प्रशासनिक भवन के सामने घंटों प्रदर्शन करने के बाद प्रदर्शनकारियों का एक प्रतिनिधि दल ने विभागीय अधिकारी एक्जक्यूटिव इंजीनियर दीपक सिंह को ज्ञापन भी सौंपा. प्रदर्शनकारियों के अगुवा नेता व यूनियन के सहायक सचिव सुब्रत गुप्त का कहना है कि पीएचइ के नॉर्दन मेक्निकल डिविजन के अंतर्गत उत्तर बंगाल के चार जिले दार्जिलिंग, जलपाईगुड़ी, कूचबिहार और अलिपुरद्वार तक नियंत्रित की जाती है. इन चार जिलों में नियमित जल आपूर्ति परिसेवा हेतु अढ़ाइ हजार से भी अधिक पंप ऑपरेटर व सुरक्षा कर्मचारी 24 घंटे काम करते हैं. 30 वर्ष से भी अधिक बीत गये आज तक इन कर्मचारियों को स्थायी नहीं किया गया.
सरकार की श्रम विरोधी नीतियों के वजह से ये कर्मचारी आज भी ठेकेदारों के अंदर ही काम करने को मजबूर हैं. अब तो कई महीनों से कर्मचारियों को वेतन भी ठेकेदार सही तरीके से नहीं दे रहे. वाम शासन में इसके लिए सरकार की ओर से पहल शुरू हुई थी. लेकिन सता परिवर्तन के बाद ही सभी मुद्दा फाइलों तक ही सिमित हो कर रह गया. श्री गुप्त का कहना है कि ममता सरकार में अस्थायी कर्मचारी स्थायी तो नहीं हुए, बल्कि आर्थिक तंगी की वजह से कर्मचारियों की छंटनी कर दी और परिसेवा पर असर न पड़े इसके लिए अत्याधुनिक तकनीक वाले मशीनों का इस्तेमाल शुरू हुआ. कुछ महिनों बाद ही ये मशीनें खराब हो गयी, जो आजतक दुरस्त ही नहीं हुई. इसका खामियाजा अब अकेले काम कर रहे पंप ऑपरेटरों को भुगतना पड़ रहा है. मशीने लगाने से पहले ये कर्मचारी सिफ्टिंग में आठ घंटे काम करते थे. लेकिन अब कर्मचारियों की कमी और आम लोगों को जल के लिए समस्या न हो इसके ये लोग 24 घंटे जान जोखिम में डाल कर काम करने को मजबूर हैं.
इन कर्मचारियों को आज तक न तो पीएफ की सुविधा मिली है और न ही जीवन बीमा व बैंक एकाउंट खोला गया है. श्री गुप्त ने दावा करते हुए कहा कि तकनिकी खराबी, पंपघर और पानीटंकियों की बदहाल अवस्था से पंप ऑपरेट करने के दौरान अगलगी की घटनाओं में दर्जन भर कर्मचारियों को अपनी जान गवानी पड़ी है और इससे भी अधिक कर्मचारी गंभीर रूप से जख्मी हुए हैं. जिन्हें आजतक सरकार की ओर से कोई मुआवजा नहीं दिया गया. ज्ञापन सौंपने के दौरान प्रदर्शनकारियों ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर उनकी मांगों पर जल्द सुनवायी नहीं होती है तो पंप ऑपरेटर और सुरक्षा कर्मचारी आंदोलन करने को बाध्य होंगे.
