ये अय्याशबाज सिंगिंग बार में जाने के बाद गाना गा रही अपनी मनपसंद हसिननाओं पर रूपये उड़ाने के लिए पहले बार में कार्य कर रहे बाउंसर या अन्य स्टाफों को पांच सौ या हजार का नोट देकर खुदरा लेते हैं. ये स्टाफ पचास व सौ रूपये के खुदरा नोट की गड्डियां पहले से ही अपने पास रखते हैं. नोटबंदी के बाद से जहां खुदरा नोट की बड़ी किल्लत हो गयी है वहीं बारों में भी पांच सौ और हजार के पुराने नोट का लेन-देन बंद कर दिया गया है. इस वजह से अय्याशबाज अब सिंगिंग बारों में जाने से कतराने लगे हैं. इस वजह से हसीन बार बालाओं पर नोट नहीं उड़ रहे. गाना गाते हुए डांस की मदहोश अदाओं पर अय्याशबाजों को अपनी ओर आकर्षित करने वाली इन हसीन बार बालाओं को अब उनका उचित मेहनताना नहीं मिल पा रहा. यही वजह है कि ऐसे सिंगिंग बारों में फ्लोर किराये पर लेकर शाम रंगिन बनाने वाले बैंड मास्टर अब स्थिति सामान्य न होने तक फ्लोर चलाने से ही कतराने लगे हैं. सिलीगुड़ी के सेवक रोड स्थित एक सिंगिग बार में अय्याशबाजों को अपने हुस्न और सुरीली आवाज से दिवाना बनाने वाली एक बार बाला ने अपना नाम न छापने की शर्त पर कहा क ि कुछ महीनों पहले जब वह दिल्ली से यहां आयी थी तब एक रात में उसके ऊपर उड़ाये गये नोटों का कमिशन अच्छा-खासा था. आमदनी इतनी अच्छी थी कि वह यहां अपना खर्च के साथ-साथ दिल्ली अपने घर भी रूपये भेज देती थी.
लेकिन नोटबंदी के बाद से यहां पहले वाली बात नहीं रही. अब न तो पहले की तरह लोग बार में आते हैं और न ही पहले की तरह उन पर नोट उड़ती हैं. वहीं, एक बैंड मास्टर का कहना है कि सिंगिंग बार मालिकों से उनका फ्लोर किराये पर लेकर यह धंधा करना पड़ता है. बार मालिक को किराये के अलावा उनके बैंड में साज बजाने वाले कलाकारों को भी मेहनताना देना पड़ता है. साथ ही बार बालाओं को भी कमीशन देना पड़ता है. यह सब-कुछ बार बालाओं पर उड़ाये गये नोटों पर ही निर्भर करता है. अगर बार की स्थिति ऐसी ही रही तो फ्लोर चलाना बंद करना पड़ेगा.
