जिस तरह से शहरी अंचल में अग्निकांड की संख्या बढ़ती जा रही है, निश्चित तौर पर दमकल विभाग को आैर अधिक संसाधनों से लैस होना होगा. दमकल विभाग के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों का रिकॉर्ड देखने पर यह साफ हो जाता है कि अाग लगने का दौर ठंड की शुरुआत होते ही होने लगता है. इसका कारण विभाग के पास नहीं है लेकिन पिछले पांच वर्षों के रिकार्ड को देखें, तो बड़ी अग्निकांड की घटनाएं नवंबर के अाखिरी सप्ताह से शुरू हो जाती हैं.
कर्मचारियों की कमी व लगातार अग्निकांड से परेशान है हावड़ा का दमकल विभाग
हावड़ा. शहर के साथ-साथ ग्रामीण अंचलों में आये दिन हो रही अग्निकांड की घटना से दमकल विभाग परेशान है. दमकल इंजनों की कमी व कर्मचारियों की पर्याप्त संख्या नहीं होने से विभाग की परेशानी बढ़ती जा रही है. कम संसाधनों में ही कर्मचारियों को अग्निशमन की जिम्मेदारी उठानी पड़ती है. जिस तरह से शहरी अंचल […]

हावड़ा. शहर के साथ-साथ ग्रामीण अंचलों में आये दिन हो रही अग्निकांड की घटना से दमकल विभाग परेशान है. दमकल इंजनों की कमी व कर्मचारियों की पर्याप्त संख्या नहीं होने से विभाग की परेशानी बढ़ती जा रही है. कम संसाधनों में ही कर्मचारियों को अग्निशमन की जिम्मेदारी उठानी पड़ती है.
इसी वर्ष पिछले 10 दिनों के अंदर आैसतन रोजाना अग्निकांड की घटना घटी है. फोरशोर रोड स्थित फोर्ट विलियम जूट मिल में आग लगी. उसी दिन एक होजियरी कारखाने में भयावह आग लगी, जिसे बुझाने में 23 इंजनों की मदद लेनी पड़ी थी. बाउड़िया जूट मिल में सात दिनों के अंदर दो दफा आग लग चुकी है. दो दिनों पहले तेलकल घाट के पास एक प्लास्टिक कारखाने में भयावह आग लगी थी. मध्य हावड़ा के टिकियापाड़ा में 10 दुकानें आधी रात को जल गयीं. अधिकतर अग्निकांड में यह बताया जाता है कि आग लगने का प्राथमिक कारण शॉट सर्किट है. दमकल विभाग भी इस कारण को नंजरअंदाज नहीं कर रहे हैं.
क्यों लगती है शॉट सर्किट से आग : दमकल विभाग ने बताया कि बेशक कोलकाता से हावड़ा पुराना शहर है लेकिन कोलकाता की तरह हावड़ा नियोजित शहर नहीं है. अधिकतर सड़कें बेहद संकरी हैं. हावड़ा शहर में जितने भी आैद्योगिक अंचल हैं वहां पर की गयी वायरिंग अंगरेजों के जमाने की है. वायरिंग का ख्याल व पुराने वायरिंग को नहीं बदलने के शॉट सर्किट होता है. साथ ही जिले में आैद्योगीकरण सही तरीके से नहीं हुआ है. एक उद्योग लगाने के समय जिन जरूरी बातों का ख्याल रखना चाहिए, उन्हें अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है.
कोलकाता की तरह नहीं है यहां डीप ट्यूब वेल : उत्तर कोलकाता को छोड़कर कोलकाता के बाकी जगहों पर सड़कों का अभाव नहीं है. दमकल विभाग के लिए कोलकाता नगर निगम की ओर से डीप ट्यूब वेल की व्यवस्था है लेकिन हावड़ा शहर व ग्रामीण अंचल में ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है. यहां की सड़कें भी संकरी हैं, जिससे मौके तक पहुंचना भी कभी- कभी असंभव सा लगता है.
घरों में आग लगने का कारण लापरवाही : दमकल विभाग ने बताया कि घरों में भी अग्निकांड की घटनाएं दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है. इसका कारण सिर्फ लापरवाही है. गैस का लॉक बंद करके रखने से ही रिस्क फैक्टर बहुत कम हो जाता है. साथ ही सिलिंडर व ओवन के बीच लगनेवाली पाइप का भी ख्याल रखें. तय सीमा के बाद पाइप को जरूर बदलें.
पांच दमकल हमेशा रहते हैं तैयार
हावड़ा फायर सर्विस स्टेशन(हेडक्वार्टर) में हमेशा पांच दमकल तैयार रहते हैं. इसके अलावा बाली, शिवपुर, लिलुआ, आलमपुर व उलबेड़िया में भी दमकल स्टेशन हैं. इन स्टेशनों पर एक से दो दमकल की गाड़ियां तैयार रहती हैं. विभाग का मानना है कि दमकल व कर्मचारियों की संख्या भी बढ़ानी जरूरी है. लोगों को जागरूक करने के लिए विभाग की ओर से स्पेशल अभियान चलाये जाते हैं, जिसमें लोगों को नुक्कड़ नाटक के माध्यम से अहम जानकारियां दी जाती हैं.