प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को भेजा फैक्स
बांग्लादेश के सामने मुद्दा उठाने की मांग
बालुरघाट : भारत और बांग्लादेश के बीच तीस्ता नदी समझौते के सुगबुगाहट के साथ ही जिले के अत्रेयी नदी को बचाने की भी पहल शुरू हो गयी है.यह नदी बांग्लादेश से निकलती है और भारत में दक्षिण दिनाजपुर जिला होकर बहती है. दोनों देशों के बीच तीस्ता नदी समझौता होने की प्रबल संभावना है और इसके लिए बांग्लादेश की प्रधानमंत्री भारत आ सकती हैं. इसी को ध्यान में रखते हुए जिलें नदियों तथा पर्यावरण की रक्षा के लिए काम कर रहे एक गैर सरकारी स्वयंसेवी संगठन ने देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी तथा राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को फैक्स भेजा है.
इसमें बांग्लादेशी प्रधानमंत्री के दौरे के दौरान अत्रेयी नदी का मुद्दा भी उठाने की अपील की गयी है.अदिना वार्डस इनवायरमेंट प्रोटेक्शन समिति के सचिव विश्वजीत बसाक तथा पर्यावरणविद तपन मजुमदार ने बताया कि दक्षिण दिनाजपुर जिले के कुमारगंज तथा बालुरघाट ब्लॉक होकर यह नदी बहती है.सबसे दिलचस्प बात यह कि इस नदी की उत्पत्ति बांग्लादेश से होती है और भारत के दक्षिण दिनाजपुर जिले के कुछ भाग से गुजरने के बाद फिर से बांग्लादेश चली जाती है.उन्होंने बताया कि बांग्लादेश के दिनाजपुर जिले के फूलबाड़ी मोहनगंज इलाके में बांग्लादेश सरकार ने बांध का निर्माण करवा दिया है.इसकी वजह से इस नदी के अस्तित्व को संकट पैदा हो गया है.
इतना ही नही नदी के पानी पर नियंत्रण करने से खेती बाड़ी में परेशानी हो रही है.इसके अलावा पर्यावरण संतुलन भी प्रभावित हुआ है. दोनों ने कहा कि बांग्लादेश में नदी पर बने बांध को तोड़कर हटाने की मांग काफी दिनों से की जा रही है.इसका कोइ असर वहां के सरकार पर नहीं पड़ा है.यहां कइ संगठनों द्वारा इस मांग को लेकर आंदोलन भी किया जा रहा है.
दोनों आगे कहा कि वहलोग शीघ ही इस बांध को तोड़ने की मांग को लेकर करीब एक लाख लोगों के हस्ताक्षर से युक्त एक ज्ञापन भी देश के प्रधानमंत्री और राज्य की मुख्यमंत्री को भेजेंगे.उन्होंने कहा कि भारत और बांग्लादेश के बीच तीस्ता नदी समझौता होना तय है.अभी बांग्लादेशी प्रधानमंत्री का दौरा भले ही टल गया है लेकिन वह इस समझौतें के लिए शीघ्र ही भारत आयेंगी. वह चाहतें हैं कि भारत अत्रेयी नदी पर बने बांध के मुद्दे को बांग्लादेश के समक्ष उठाए.
