जमीन अभी भी बागडोगरा एयरपोर्ट के लिए सबसे बड़ी समस्या

सिलीगुड़ी. यात्रियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए सिलीगुड़ी के निकट बागडोगरा हवाइ अड्डे पर टर्मिनल भवन के लिये एक सौ एकड़ से भी अधिक जमीन की आवश्यकता है. जमीन देने को लेकर एयरपोर्ट अथोरिटी ऑफ इंडिया (एएआइ)के चेयरमैन ने राज्य की मुख्यमंत्री से भी मुलाकात की. मुख्यमंत्री ने बागडोगरा एयरपोर्ट के आसपास 40 से […]

सिलीगुड़ी. यात्रियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए सिलीगुड़ी के निकट बागडोगरा हवाइ अड्डे पर टर्मिनल भवन के लिये एक सौ एकड़ से भी अधिक जमीन की आवश्यकता है. जमीन देने को लेकर एयरपोर्ट अथोरिटी ऑफ इंडिया (एएआइ)के चेयरमैन ने राज्य की मुख्यमंत्री से भी मुलाकात की. मुख्यमंत्री ने बागडोगरा एयरपोर्ट के आसपास 40 से 45 एकड़ जमीन देने का भरोसा दिया है.

इस संबंध में एक कमिटी गठित की गयी है. इस कमिटी की पहली बैठक भारयीत विमानपत्तण कार्यालय बागडोगरा में की गयी. जिसमें एएआइ चेयरमैन डा. गुरू प्रसाद महापात्रा, बागडोगरा हवाई अड्डा के निदेशक राकेश आर. सहाय क्षेत्रीय निदेशक सहित राज्य सरकार के अन्य अधिकारी उपस्थित थे. बैठक के बाद टर्मिनल भवन के लिये चार से पांच विकल्पों के साथ उपयुक्त जमीन का चुनाव किया जाना है.

उल्लेखनीय है कि बागडोगरा हवाई अड्डे की यात्री क्षमता सात लाख प्रतिवर्ष है. इस वर्ष यात्रियों की संख्या दस लाख के आंकड़े को पार चुकी है. यात्री की बढ़ती संख्या के साथ आवश्यक सुविधा मुहैया कराने के लिये बागडोगरा हवाई अड्डे पर टर्मिनल भवन, रनवे का विस्तार, पार्किंग, कारगो आदि बनाने की आवश्यकता है. इसके लिये एयरपोर्ट अथोरिटी को एक सौ बीस एकड़ जमीन की आवश्यकता है. इस निर्माण कार्य में 19 सौ करोड़ रूपये खर्च होने की संभावना जातायी जा रही है. इतनी जमीन बागडोगरा हवाई अड्डा के आसपास मिलना एक गंभीर समस्या है. उत्तर बंगाल ,सिक्किम, भूटान, सिक्किम सहित बिहार के अधिकांश हिस्से को मिलाकर बागडोगरा एकमात्र हवाई अड्डा है. बुधवार को बागडोगरा हवाई अड्डे पर पत्रकारों को संबोधित करते हुए एएआइ के चेयरमैन डा. गुरू प्रसाद महामात्रा ने बताया कि पश्चिम बंगाल सरकार से जमीन की मांग की गयी है. इस मुद्दे को लेकर हाल ही में उन्होंने स्वयं मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से मुलाकात की. बागडोगरा में एक सौ एकड़ से भी अधिक जमीन मुहैया कराना मुश्किल है. मुख्यमंत्री ने इस इलाके में करीब 45 एकड़ जमीन मुहैया कराने का भरोसा दिया है. उन्होंने कहा कि बागडोगरा हवाई अड्डे के आसपास जमीन के लिये चार से पांच विकल्प हैं. इसके लिये एक कमिटी गठित की गयी है. तीन से चार सप्ताह में यह कमिटी योजना के अनुसार उपलब्ध विकल्पों में से जमीन का चुनाव करेगी. इसके बाद उस जमीन को देने की मांग राज्य सरकार से की जायेगी. जमीन मिलते ही निर्माण कार्य शुरू कर दिया जायेगा.

19 एकड़ जमीन लेने में लगे छह साल ः गौरतलब है कि बागडोगरा हवाई अड्डे पर आईएलएस(इंस्ट्रूमेंट लेडिंग सिस्टम) प्रणाली के लिए 19 एकड़ जमीन मुहैया कराने में राज्य सरकार को छह वर्षों का समय लग गया. हालांकि जमीन मुहैया कराये जाने के बाद काफी तीव्र गति से काम किया गया है. जनवरी से आईएलएस प्राणाली का शुभारंभ कर दिया जायेगा. इस संबंध में श्री महामात्रा ने बताया कि आईएलएस के लिये मांग के अनुसार जमीन चाहिए थी, लेकिन यहां हमारे पास विकल्प है. उपलब्ध जमीन के हिसाब से योजना बनाने का विकल्प है. उन्होंने कहा कि दिन-प्रतिदिन यात्रियों की संख्या बढ़ रही है. विदेशी एयरलाइंस के हवाइ जहाज बागडोगरा पहुंच रहे हैं. विदेशी हवाइ अड्डे की तरह बुनियादी ढांचागत व्यवस्था करना हमारी प्राथमिकता है. आगामी दिनों में कोलकाता, गुवाहाटी, अगरतल्ला की तरह बागडोगरा हवाई अड्डे का प्रारूप भी बदल दिया जायेगा.

क्षेत्रीय संपर्क योजना कब होगी शुरू ः पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने उत्तर बंगाल के कूचबिहार, बालूरघाट और मालदा से हवाई उड़ान जल्द शुरू करने की घोषणा की थी. जो आज तक शुरू नहीं हुयी. जिस पर विरोधी भी तंज कस रहे हैं. पत्रकारों को संबोधित करते हुए डा. महापात्रा ने बताया कि एक घंटे की दूरी वाले स्थानों से उड़ान सेवा शुरू करने के लिये ही राज्य सरकार ने क्षेत्रीय संपर्क योजना(आरसीएस) की शुरूआत की है. श्री महापात्रा ने बताया कि एक घंटे की यात्रा के लिये एक टिकट पर करीब 7 हजार रूपया खर्च होता है. राज्य सरकार ने सब्सिडी देकर तीन हजार के अंदर यात्रा कराने की योजना बनाई है. इस योजना के तहत एयरलाएंस कंपनियां टेंडर भरेगी, फिर यह सेवा शुरू की जायेगी. इस योजना के लिये टेंडर निकाल दिया गया है. इधर,सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार इस वर्ष भी टेंडर निकला था, लेकिन किसी भी एयरलाइंस कंपनी ने इस योजना में रूची नहीं दिखाई.

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