वाहनों के चालान काटने में जुटे हैं सिविक वोलेंटियर वरिष्ठ पुलिस अधिकारी मौके से नदारद
सिलीगुड़ी. सिलीगुड़ी मेट्रोपोलिटन पुलिस कमिश्नरेट की ट्राफिक व्यवस्था पर सवाल उठते रहे हैं. इसको सही करने के लिए कोइ कारगर पहल नहीं की जा रही है. स्थानीय लोगों का आरोप है कि यातायात सही नहीं कर पुलिस अधिकारी वाहन वालों को परेशान कर रहे हैं. खासकर सिविक वोलेंटियर की भुमिका को लेकर लोग संदेह प्रकट […]
सिलीगुड़ी. सिलीगुड़ी मेट्रोपोलिटन पुलिस कमिश्नरेट की ट्राफिक व्यवस्था पर सवाल उठते रहे हैं. इसको सही करने के लिए कोइ कारगर पहल नहीं की जा रही है. स्थानीय लोगों का आरोप है कि यातायात सही नहीं कर पुलिस अधिकारी वाहन वालों को परेशान कर रहे हैं. खासकर सिविक वोलेंटियर की भुमिका को लेकर लोग संदेह प्रकट कर रहे हैं.
आरोप है कि पुलिस अधिकारियों की सहायता के लिये नियुक्त सिविक वोलेंटियर खुद को ट्राफिक पुलिस अधिकारी मानने लगे है. हाथ दिखाकर जबरदस्ती गाड़ियों को रोकना, वेवजह फजीहत करना, चालान काटना आदि से लोग परेशान हो गये हैं. सिलीगुड़ी वाणिज्यिक दृष्टिकोण से काफी महत्वपूर्ण शहर है. इस शहर को पूर्वोत्त भारत का प्रवेशद्वार भी माना जाता है.
कई पड़ोसी देशों के साथ देश के विभिन्न राज्यों की सीमा सिलीगुड़ी से सटी हुयी है. हजारों की संख्या में ट्रक व यात्री वाहनों की इस शहर से आवाजाही होती है. इसके अतिरिक्त नौकरी व अपने व्यवसाय के लिये शहर के लोग भी इधर-उधर यातायात करते हैं. शहर की जाम समस्या से परेशान लोग उपर से सिविक वोलेंटियर की मनमानी से और परेशान हैं. सिविक वोलेंटियरों के खिलाफ लोगों में रोष है.
सिलीगुड़ी शहर के कई द्वार हैं. सिक्कम, डुआर्स, असम की ओर आने-जाने वालों के लिये भक्तिनगर थाने के सामने चेकपोस्ट, दार्जिलिंग की ओर जाने-आने वालों के लिये दार्जिलिंग मोड, जलपाईगुड़ी, कूचबिहार आदि के लिये फूलबाड़ी, बिहार, कोलकाता, नेपाल की ओर आने-जाने वालों के लिये बागडोगरा सहित शहर के कई मोड़ पर पुलिस जीप दिखाई देती है. आरोप है कि जीप में पुलिस अधिकारी बैठे होते हैं जबकि सिविक वोलेंटियर जीप के सामने खड़े होकर दूरगामी ट्रकों को रोकते हैं. बाइक वालों के लिए तो और भी आफत है. हेलमेट या कागजात संबंधी गड़बड़ी पाये जाने वाले वाहनों के खिलाफ कार्यवायी को ठीक है लेकिन बेवजह परेशान करना सही नहीं है. थोड़ा भी सवाल करने पर लाईसेंस व गाड़ी के अन्य कागजात की मांग करते हैं. इसके बाद तुरंत चालान काट देते हैं. नियमानुसार सिविक वोलेंटियरों को पुलिस अधिकारियों की सहायता के लिये तैनात किया गया है. लेकिन सविक वोलेंटियर अब खुद को ही पुलिस अधिकारी समझ बैंठे हैं. ट्राफिक पुलिस अधिकारी के निर्देशानुसार ये वाहनों को दिशा दिखा सकते हैं, रोक सकते हैं, जांच कर सकते हैं लेकिन कागजात नहीं देख सकते. पर आलम यह है कि सिविक वोलेंटियर तो चालान के फॉर्म भर रहे हैं.
हेलमेट ना होने या कागजात संबंधी गड़बड़ी पाये जाने पर ये सिविक वोलेंटियर खुद ही चालान काटते है और अधिकारी से सिर्फ हस्ताक्षर कराते हैं. अधिकारी से हस्ताक्षर करा कर लाने के दौरान लोगों को घंटो इंतजार करना पड़ता है. कभी-कभी अधिकारियों की अनुपस्थिति में लोगों को लाईसेंस या अन्य कागज उन्हीं वोलेंटियर के पास छोड़ जाना पड़ता है. इसके बाद शुरू होता है अधिकारी के पीछे चक्कर लगाने का सिलसिला. सब कुछ जानने के बाद भी पुलिस अधिकारी चुपचाप बैठे हैं.
क्या कहते हैं पुलिस अधिकारी
इस संबंध में सिलीगुड़ी मेट्रोपोलिटन पुलिस कमिश्नर सी.एस. लेप्चा से संपर्क करने पर उन्होंने डीसीपी ट्राफिक से बात करने को कहा. सिलीगुड़ी मेट्रोपोलिटन पुलिस कमिश्नरेट के डिप्टी पुलिस कमिश्नर(ट्राफिक) सुनील यादव ने बताया कि सिविक वोलेंटियर को पुलिस अधिकारियों की सहायता के लिये नियुक्त किया गया है. पुलिस अधिकारियों के निर्देशानुसार वे हाथों का काम कर सकते हैं लेकिन दिमाग संबंधी सभी कार्य पुलिस अधिकारी को ही करना है. चालान काटने का जहां तक मसला है, तो कोई भी सिविक वोलेंटियर चालान नहीं काट सकता है. ट्राफिक पुलिस के आईसी रैंक के अधिकारी के हस्ताक्षर के बिना अदालत चालान को स्वीकार नहीं करेगी. उन्होंने कहा कि पुलिस नागरिकों की सहायता के लिये है ना कि उन्हें परेशान करने के लिये. अधिकारियों के निर्देशानुसार सिविक वोलेंटियर चालान भर सकते है, वाहनों को खड़ा करा सकते हैं, ट्राफिक नियमों का उल्लघंन करने वालों का पीछा कर पकड़ सकते हैं.