तृणमूल के अविश्वास प्रस्ताव के दौरान मात्र 35 सदस्य उपस्थित थे. मालदा जिला परिषद की स्थायी समिति सहित सदस्यों की कुल संख्या 66 है. बहुमत के लिये तृणमूल को 34 के आंकड़े को पार करना था. आज विधायक नीहार घोष व माकपा के टिकट पर जीतीं और तृणमूल में शामिल होने वाली विधायक दीपाली विश्वास उपस्थित नहीं थी. जिला परिषद पर कब्जे के बाद कांग्रेस के उपसभाधिपति सहित नौ कर्माध्यक्ष को भी उनके पद से हटा दिया गया.
मालदा जिला परिषद पर तृणमूल का कब्जा
मालदा. मालदा जिला परिषद अब पूरी तरह से तृणमूल का कब्जा हो गया है. बुधवार को मालदा जिला परिषद के उप सभाधिपति व 9 कर्माध्यक्षों के खिलाफ तृणमूल द्वारा लाये गये अविश्वास प्रस्ताव पर निर्णय होना था. 10 नवंबर को कांग्रेस के उपसभाधिपति सैयद अहमद एवं नौ कर्माध्यक्ष के खिलाफ तृणमूल कांग्रेस ने अविश्वास प्रस्ताव […]

मालदा. मालदा जिला परिषद अब पूरी तरह से तृणमूल का कब्जा हो गया है. बुधवार को मालदा जिला परिषद के उप सभाधिपति व 9 कर्माध्यक्षों के खिलाफ तृणमूल द्वारा लाये गये अविश्वास प्रस्ताव पर निर्णय होना था. 10 नवंबर को कांग्रेस के उपसभाधिपति सैयद अहमद एवं नौ कर्माध्यक्ष के खिलाफ तृणमूल कांग्रेस ने अविश्वास प्रस्ताव नोटिस दिया था. बुधवार को कांग्रेस के एक भी सदस्य अविश्वास प्रस्ताव के समय नहीं आये.
मालदा जिला परिषद के स्थायी समिति पर तृणमूल का कब्जा होने के संबंध में कांग्रेस सांसद मौसम नूर ने कहा कि लोभ, प्रलोभन व डर दिखाकर सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कांग्रेस जिला परिषद पर कब्जा करने में सफल हुयी है. जनता तृणमूल की इस गंदी राजनीति को सही तरीके से नहीं देख रही है. तृणमूल जिला परिषद पर कब्जा कर मालदा के विकास को बाधित करना चाहती है. माकपा के जिला सचिव अंबर मित्र ने कहा कि मालदा जिला परिषद पर तृणमूल का कब्जा लोकतंत्र को एक तमाचा है.
मालदा जिला परिषद में तृणमूल कांग्रेस के नेता उज्जवल चौधरी ने कहा कि कांग्रेस का कोई भी सदस्य आज हाजिर तक नहीं हुआ. स्वाभाविक रूप से उपसभाधिपति व 9 कर्माध्यक्ष को उनके पद से हटा दिया गया. अगले एक महीने के भीतर उपसभाधिपति व कर्माध्यक्ष का चुनाव किया जायेगा.