ममता को मिली ‘फामोहिमाल वांतो आन्या’ की उपाधि

सिलीगुड़ी. राज्य की मुख्यमंत्री सुश्री ममता बनर्जी को पहाड़ के भुजेल समुदाय ने ‘फामोहिमाल वांतो आन्या’ नामक उपाधि से नवाजा है. इस उपाधि के जरिए भुजेल संप्रदाय ने मुख्यमंत्री को कंचनजंघा की तरह पवित्र और सबकी रक्षा करने वाली बताया है. इस उपाधि के पीछे भी एक राज छिपा है. राज्य सरकार ने पहाड़ की […]

सिलीगुड़ी. राज्य की मुख्यमंत्री सुश्री ममता बनर्जी को पहाड़ के भुजेल समुदाय ने ‘फामोहिमाल वांतो आन्या’ नामक उपाधि से नवाजा है. इस उपाधि के जरिए भुजेल संप्रदाय ने मुख्यमंत्री को कंचनजंघा की तरह पवित्र और सबकी रक्षा करने वाली बताया है. इस उपाधि के पीछे भी एक राज छिपा है. राज्य सरकार ने पहाड़ की भुजेल जाति के लिये उनकी मांग के अनुसार एक विकास बोर्ड का गठन किये जाने की घोषणा कर दी है. बंगाल सरकार की ओर से एक गजट नोटिफिकेशन निकाल कर भुजेल विकास एंड सांस्कृतिक बोर्ड गठित किया गया है. करीब एक वर्ष के संघर्ष के बाद अपनी जाति के लिए मिले विकास बोर्ड के लिए भुजेल संप्रदाय ने मुख्यमंत्री को धन्यवाद ज्ञापन किया है.
मंगलवार को सिलीगुड़ी जर्नलिस्ट क्लब में पत्रकारों को संबोधित करते हुए उक्त जानकारी पश्चिम बंगाल भुजेल विकास एंड सांस्कृतिक बोर्ड के चेयरमैन प्रदीप कुमार खवास ने दी. पत्रकार सम्मेलन में उपस्थित भुजेल कल्चरल एंड वेलफेयर एसोसिएशन के महासचिव कुमार खवास ने बताया कि वर्ष 2015 के नंवबर से भुजेल समुदाय ने भी अपनी जाति और संस्कृति के विकास के लिये राज्य सरकार से एक बोर्ड गठन करने की मांग की. करीब एक वर्ष के संघर्ष के बाद राज्य की वर्तमान तृणमूल सरकार ने 19 अक्तूबर को एक प्रस्ताव पास कर बोर्ड गठन करने की घोषणा की.
बोर्ड गठन के बाद पश्चिम बंगाल पिछड़ी जाति कल्याण मंत्रालय के निर्देशानुसार एक प्रतिनिधि मंडल का चुनाव कर सर्वसम्मति से नाम भेजा गया. इसके बाद मंत्रालय ने चेयरमैन प्रदीप कुमार खवास के नेतृत्व में भुजेल विकास बोर्ड का गठन कर दिया. इस बोर्ड की घोषणा राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने 22 सितंबर को कालिंपोग में आयोजित एक सरकारी कार्यक्रम में कर दिया था.

बोर्ड गठन की आधिकारिक रूप से पुष्टि करते हुए मंत्रालय की ओर से एक दस्तावेज पिछले 11 नवंबर को भुजेल कल्चरल एंड वेलफेयर एसोसिएशन को सौंपा गया. श्री खवास ने बताया कि पहाड़ की विभिन्न जनजातियों के विकास के लिये तृणमूल सरकारी की ओर से बनाया गया यह ग्यारहवां जाति विकास बोर्ड है. हांलाकि भुजेल जाति के विकास के लिये राज्य सरकार की ओर से अब तक आर्थिक आवंटन नहीं किया गया है. उन्होंने आगे कहा कि पिछड़ी जाति कल्याण मंत्रालय के निर्देशानुसार यह बोर्ड अपनी जाति और संस्कृति के विकास के लिए काम करेगा.

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