अंतराष्ट्रीय कुडो कैम्प का आयोजन थाईलैंड के बैंकाक में किया जा रहा है. इस कैंप के आयोजन का खर्च भी अक्षय कुमार ही उठा रहे हैं.कैंप में शामिल होने के लिए इन पांचो खिलाड़ियों के साथ ही देश के अन्य स्थानों से भी कुछ खिलाड़ियों का चयन किया गया है.. इस कैंप में कुल तीस प्रतियोगी हिस्सा ले रहे हैं. कुडो मिस्त्र का मार्शल आर्ट है. अंकुर को बचपन से ही कुडो सीखने का शौक था. मात्र 15 वर्ष की उम्र में ही वह अक्षय कुमार की नजर में आ जायेगा, यह नहीं सोचा था. उनके माध्यम से ही उसे अंतराष्ट्रीय कुडो कैंप में प्रशिक्षण लेने का भी मौका मिला है. बंगाल एकेडमी की ओर से आयोजित एक पत्रकार सम्मेलन में अंकुर के कोच सहदेव वर्मन ने बताया कि अंकुर एक मध्यम वर्गीय परिवार का बच्चा है.
उसमें प्रतिभा की कोइ कमी नहीं है. इसके पिता एक राशन की दुकान चलाते है. उसी की कमाई से चार लोगों का परिवार किसी तरह गुजर बसर कर रहा है. अपने बेटे को विदेश भेजकर प्रशिक्षित करने की क्षमता इस परिवार के पास नहीं है. अक्षय कुमार ने स्वयं अंकुर को इस कैंप में शामिल होने का प्रस्ताव दिया. पूरा खर्च अक्षय कुमार ही वहन कर रहे हैं.
अंकुर पश्चिम बंगाल का एकमात्र प्रतियोगी है जिसे इस अंतराष्ट्रीय कैंप में शामिल होने का मौका मिला है. यह हमारे लिये गर्व की बात है. अंकुर ने बताया कि बचपन से उसे कुडो सीखने की इच्छा थी. वर्ष 2015 में सिलीगुड़ी इंडोर स्टेडियम में उसने कराटे में ब्लैक बेल्ट हासिल किया. इसके बाद नेशनल कुडो चैम्पियनशिप में हिस्सा लेकर स्वर्ण पदक भी हासिल किया. इसी प्रतियोगिता में अक्षय कुमार ने चुना. इस सहायता के लिये मैं हमेशा उनका आभारी रहूंगा.
