नलजोवा पाड़ा गांव के लोग वापस मांग रहे हैं 16 बीघा जमीन

जलपाईगुड़ी: बांग्लादेश के साथ एक जमीन विवाद ने अभी जलपाईगुड़ी में जोर पकड़ लिया है. स्थल सीमा को लेकर भारत-बांग्लादेश के बीच हुए समझौते से छीटमहल और ‘एडवर्स पजेशन’ की समस्या का हल हो चुकी है, लेकिन जलपाईगुड़ी के दक्षिण बेरूबाड़ी की जमीन पर अब भी बांग्लादेश दावा कर रहा है. इसे लेकर इलाके में […]

जलपाईगुड़ी: बांग्लादेश के साथ एक जमीन विवाद ने अभी जलपाईगुड़ी में जोर पकड़ लिया है. स्थल सीमा को लेकर भारत-बांग्लादेश के बीच हुए समझौते से छीटमहल और ‘एडवर्स पजेशन’ की समस्या का हल हो चुकी है, लेकिन जलपाईगुड़ी के दक्षिण बेरूबाड़ी की जमीन पर अब भी बांग्लादेश दावा कर रहा है. इसे लेकर इलाके में उत्तेजना का माहौल है. दक्षिण बेरूबाड़ी के नलजोवा पाड़ा गांव के एक हजार भारतीय नागरिकों ने बांग्लादेश के कब्जेवाली जमीन वापस लौटाने की मांग की है. जमीन वापस नहीं होने पर ग्रामवासियों ने जोरदार आंदोलन में उतरने की चेतावनी दी है. इसके लिए ‘जमीन बचाओ कमिटी’ के बैनर तले आंदोलन की योजना पर विचार हो रहा है.
बेरूबाड़ी सीमांत प्रतिरक्षा एवं उन्नयन संग्राम कमिटी के महासचिव सारदा प्रसाद दास ने बताया कि नलजोवा पाड़ा भौगोलिक नक्शे पर चिड़िया की चोंच की तरह दिखता है. इस ग्राम की 25 नंबर सीट के तहत 13 से 15 नंबर सीमांत पिलर तक जमुना नदी के उत्तरी हिस्से में भारत की 16 बीघा जमीन बांग्लादेश के कब्जे में है. इसी सीट के 10 से 13 नंबर पिलर के बीच और साढ़े चौदह बीघा जमीन पर बांग्लादेश दावा कर रहा है. साल 1986 में देखा गया कि बांग्लादेश ने उक्त 16 बीघा जमीन अपने कब्जे में रिकॉर्ड कर ली. लेकिन इसे लेकर आपत्ति इसलिए नहीं हुई क्योंकि उस जमीन पर कोई आबादी नहीं थी.

इस कब्जे को लेकर जब पहली बार आपत्ति की गयी, तो 1998 में दोनों देशों के सर्वेक्षणकर्ताओं के बीच एक समझौता हुआ. उसमें कहा गया कि भारत की 16 बीघा जमीन पर बांग्लादेश का दखल रहेगा, जबकि बाकी जिस साढ़े चौदह बीघा जमीन पर भारत का दखल है, उस पर भारत का ही दखल रहेगा. लेकिन यह समझौता होते ही बांग्लादेश ने बड़ी चालाकी से साढ़े चौदह बीघा जमीन पर कब्जे की योजना बना ली. 1998 की बैठक में दोनों देशों के बीच हुए फैसले के मुताबिक, इस इलाके में कंटीली बाड़ लगाने और सीमांत सड़क तैयार करने के लिए यथास्थिति बनाये रखने का निर्देश जारी किया गया. सारदा प्रसाद का आरोप है कि इस साढ़े चौदह बीघा जमीन को बांग्लादेश ने एकतरफा तरीके से अपने नक्शे में दिखा दिया. अपने नक्शे में भारत की इस जमीन का दिखाने का मकसद अपनी सीमा सिंग रोड तक खींच ले जाना है. लेकिन ऐसा होने नहीं दिया जायेगा. भारतीय जमीन वापस लेने का आंदोलन दोबारा शुरू करने के अलावा ग्रामवासियों के पास कोई रास्ता नहीं है.

इधर बेरूबाड़ी सीमांत प्रतिरक्षा एवं उन्नयन संग्राम कमिटी के सलाहकार पूर्व विधायक गोविंद राय ने कहा कि स्थल सीमांत समझौते में नलजोवा पाड़ा की समस्या के समाधान का मामला नहीं उठाया गया. प्रशासन इस मामले में अविलंब कदम उठाये. उन्होंने यह भी कहा कि 11 नंबर सब-पिलर से 12 नंबर सब-पिलर और 12 नंबर सब-पिलर से 13 नंबर सब-पिलर के बीच तीन बीघा बांग्लादेशी जमीन है, जिस पर भारत का कब्जा है. इसी जगह सीमा के जीरो प्वाइंट से 150 गज छोड़कर कंटीली बाड़ लगायी जानी है और सीमांत सड़ बनायी जानी है, जिसकी लंबाई तीन किलोमीटर होगी. इससे नलजोवा पाड़ा के 104 परिवार (700) लोग विस्थापति होंगे. इसलिए 10 नंबर सब-पिलर से 13 नंबर सब-पिलर तक मौजूदा सड़क को सीमांत सड़क बनाकर बाड़ ल गाने से भौगौलिक मानचित्र ठीक रहेगा. इस मामले में जलपाईगुड़ी के अतिरिक्त जिला अधिकारी तथा जिला भूमि एवं भूमि राजस्व अधिकारी डॉ विश्वनाथ ने बताया कि प्रतिरक्षा कमिटी का मांग पत्र मिला है. देशहित को नुकसान नहीं हो, इसलिए इस बारे में राज्य सरकार को जानकारी दी जायेगी.

इलाके में उत्तेजना बढ़ने की है संभावना
दक्षिण बेरूबाड़ी के उप-प्रधान संजीव राय ने कहा कि स्थल सीमा समझौते के समय ये सब मामले निचले स्तर पर ही निपटा लिये जाने चाहिए थे. दक्षिण बेरूबाड़ी के विवादित गांवों (एडवर्स पजेशन) की समस्या हल कर लिये जाने के बावजूद नलजोवा पाड़ा की समस्या बची रहने को लेकर इलाके में उत्तेजना बढ़ने की संभावना है. नलजोवा पाड़ा के दो निवासियों मलिनचंद्र राय और खगेंद्रनाथ राय ने बताया कि बांग्लादेश ने पहले बस्तीविहीन 16 बीघा जमीन ले ली, जिसे लेकर आपत्ति नहीं है. लेकिन चालाकी से बाकी साढ़े चौदह बीघा जमीन को हड़प जाने की कोशिश को बरदाश्त नहीं किया जायेगा. साढ़े चौदह बीघा जमीन लेकर जब उस पर कंटीली बाड़ लगा दी जायेगी जो गांव के एक हजार लोग वहां नहीं रह पायेंगे. बाड़ लगने से और भी जमीन बांग्लादेश में चली जायेगी. ऐसा होने नहीं दिया जायेगा.

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