दार्जिलिंग को ‘कश्मीर’ बनाने की साजिशः अभिजीत

सिलीगुड़ी. पहाड़ों की रानी ‘दार्जिलिंग’ को दीदी दूसरा ‘कश्मीर’ बनाने की साजिश रच रही है. यह उचित नहीं है. यह कहना है नक्सल संगठन सीपीआइ (एमएल) के केंद्रीय कमेटी के वरिष्ठ सदस्य व प्रवक्ता अभिजीत मजुमदार का. गोरखालैंड अलग राज्य की मांग लोकतांत्रिक अधिकार है और लोकतांत्रिक आवाज को कभी भी जबरन दबाया नहीं जा […]

सिलीगुड़ी. पहाड़ों की रानी ‘दार्जिलिंग’ को दीदी दूसरा ‘कश्मीर’ बनाने की साजिश रच रही है. यह उचित नहीं है. यह कहना है नक्सल संगठन सीपीआइ (एमएल) के केंद्रीय कमेटी के वरिष्ठ सदस्य व प्रवक्ता अभिजीत मजुमदार का. गोरखालैंड अलग राज्य की मांग लोकतांत्रिक अधिकार है और लोकतांत्रिक आवाज को कभी भी जबरन दबाया नहीं जा सकता. श्री मजुदार का कहना है कि गोरखालैंड के मुद्दे पर ममता सरकार वाम सरकार के नक्शे कदम (नीतियों) पर ही चल रही है.

पहाड़ पर 1986-88 में सुभाष घिसिंग की अगुवायी जब गोरखालैंड आंदोलन हुआ उस समय भी वाम सरकार ने आंदोलन को जबरन दबाने की कोशिश की थी और बाद में आंदोलन ने हिंसक रूप धारन कर लिया. श्री मजुमदार ने कहा कि गोरखालैंड की आवाज को दबाने के लिए मुख्यमंत्री जो रणनीति चला रही है इससे आंदोलन शांत होने के बजाये और उग्र होने की ओर इंगित कर रहा है. उन्होंने दीदी पर पहाड़ को जातियों में भी तोड़ने का आरोप लगाया. उनका कहना है कि ममता पहाड़ पर जातिगत राजनीति के मारफत गोरखाओं को आपस में लड़ाने की साजिश रच रही है.

उन्होंने दीदी से आंदोलनकारियों से टकराने के बजाये तुरंत सर्वदलीय बैठक बुलाने की गुहार लगायी है और पहाड़ की राजनैकित समस्या को आपस में बातचीत के जरिये जल्द सुलझाने की अपील की है. श्री मजुमदार का कहना है कि शांत पहाड़ के बार-बार गरम होने से यहां सबसे महत्त्वपूर्ण पेशा पर्यटन उद्योग भी प्रभावित होता है. दहशत की वजह से देसी-विदेशी सैलानी आने से भी कतराने लगते हैं.

श्री मजुमदार ने गोरखालैंड की समस्या को लेकर केंद्र सरकार से भी हस्तक्षेप की मांग की. वजह गोरखालैंड के विकल्प के तौर पर पहाड़ पर गोरखा टेरिटोरियल एडमिनिस्ट्रेशन (जीटीए) समझौता राज्य, केंद्र सरकार और गोजमुमो के बीच हुआ है. ऐसे में केंद्र सरकार खामोश नहीं रह सकती.

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By Prabhat Khabar Digital Desk

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