जिला सिंचाई विभाग की ओर से राज्य सरकार को ऐसी ही रिपोर्ट सौंपी गई है. नदी कटाव रोकने की जिम्मेदारी केन्द्र सरकार की है. फरक्का बैरेज केन्द्र सरकार की ही एजेंसी है. 2004 से ही राज्य सरकार की ओर से नदी कटाव रोकने के लिए उपयुक्त कदम उठाने की मांग फरक्का बैरेज प्रबंधन से की जाती रही है. मालदा सिंचाई विभाग सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इस साल गंगा नदी से रिकार्ड जल प्रवाहित हुआ है. आम तौर पर बरसात के समय गंगा नदी में 26 से लेकर 27 लाख क्यूसेक पानी प्रवाहित होता है.
इस साल यह आंकड़ा बढ़कर 28 से 29 लाख क्यूसेक हो गया है. इसके साथ ही 30 करोड़ मेट्रिक टन बालू, कचरा तथा मिट्टी बहकर आया है. इससे नदा का गर्भ काफी भर गया है. ऐसी परिस्थिति में बाढ़ आने की स्थिति में चार से पांच किलोमीटर इलाका गंगा में समाहित हो जाने की संभावना है. फरक्का बैरेज के इंजीनियरों ने भी इस बात को स्वीकार किया है. लेकिन वह धन का रोना रो रहे हैं.
फरक्का बैरेज के इंजीनियरों का कहना है कि नदी के गर्भ को गहरा करना काफी जरूरी है. लेकिन इसके लिए बड़े पैमाने पर पैसे की आवश्यकता होगी. हालांकि इंजीनियरों ने उम्मीद जाहिर करते हुए कहा है कि केन्द्रीय टीम ने 31 अगस्त को कटाव प्रभावित इलाकों का दौरा किया है. वह लोग सभी परिस्थिति को देखकर गये हैं. समस्या का कोई न कोई समाधान अवश्य निकालेंगे. इधर, सिंचाई विभाग के एक्जीक्यूटिव इंजीनियर अमरेश कुमार सिंह ने कहा है कि राज्य सरकार को रिपोर्ट सौंप दी गई है. इसके साथ ही कटाव वाले नये इलाकों की भी पहचान की गई है. इसकी भी जानकारी रिपोर्ट में दी गई है.
