किसान ने पूरी जमापूंजी लगा बनाया देवी चौधरानी का मंदिर

संन्यासी विद्रोह के नायक भवानी पाठक की भी प्रतिमा स्थापित जलपाईगुड़ी. एक किसान ने अपने खर्च पर रातोरात देवी चौधरानी मंदिर की स्थापना कर दी. राजगंज के पातलीभाषा में कालीबाड़ी इलाके में इस मंदिर का निर्माण किया गया है. राजवंशी समुदाय के बीच देवी चौधरानी की अपनी एक अलग महत्ता है. ये लोग देवी चौधरानी […]

संन्यासी विद्रोह के नायक भवानी पाठक की भी प्रतिमा स्थापित
जलपाईगुड़ी. एक किसान ने अपने खर्च पर रातोरात देवी चौधरानी मंदिर की स्थापना कर दी. राजगंज के पातलीभाषा में कालीबाड़ी इलाके में इस मंदिर का निर्माण किया गया है. राजवंशी समुदाय के बीच देवी चौधरानी की अपनी एक अलग महत्ता है. ये लोग देवी चौधरानी को डकैत रानी के नाम से पुकारते हैं. मंदिर में सिर्फ देवी चौधरानी की नहीं, बल्कि उस संन्यासी विद्रोह के नायक भवानी पाठक की प्रतिमा भी स्थापित की गयी है.
राजगंज के शिकारपुर चाय बागान में कई सौ साल पुराना देवी चौधरानी मंदिर है. पास ही भवानी पाठक का भी मंदिर बनाया गया है. ये दोनों मंदिर काठ के बने हुए हैं. जलपाईगुड़ी शहर के गौशाला मोड़ में भी देवी चौधरानी का मंदिर है. अब कालीबाड़ी इलाके में एक नये मंदिर की स्थापना किसान गोल्टू राय ने की है. इस मामले में गोल्टू राय का कहना है कि समाज में गरीब लोगों की दुर्दशा लगातार बढ़ती जा रही है. कुछ लोग जहां लगातार अमीर हो रहे हैं, वहीं दूसरी ओर अधिकतर लोग गरीबी और दुख में जी रहे हैं. वह चाहते हैं कि समाज के सभी लोगों का कल्याण हो. वह कई मंदिरों का दौरा कर चुके हैं. उसके बाद ही देवी चौधरानी और भवानी पाठक का मंदिर बनाने का निर्णय लिया.
श्री राय ने बताया कि उन्होंने खेती करके 70 हजार रुपये जमा किये थे. उसी पैसे को खर्च कर उन्होंने देवी चौधरानी मंदिर की स्थापना की है. उन्होंने उम्मीद जाहिर करते हुए कहा कि आसपास के लोग भारी संख्या में इस मंदिर में पूजा करने आयेंगे. इधर, देवी चौधरानी मंदिर के पास ही भवानी पाठक की प्रतिमा स्थापित की गयी है और वहां भी मंदिर बना दिया गया है. मंदिर के गेट पर पुलिसकर्मियों तथा वनकर्मियों के वेश में दो-दो मूर्तियां बनायी गयी हैं. इन मूर्तियों को लगाने के संबंध में किसान श्री राय ने कहा कि इस इलाके में चोरी-डकैती की काफी घटनाएं घटी हैं. मान्यता है कि पुलिस वेश में मूर्ति स्थापित किये जाने से ऐसी घटनाओं में कमी आयेगी. वहीं वन्य कर्मियों की प्रतिमा लगने से जंगली जानवरों के हमले नहीं होंगे.
क्या कहते हैं शोधकर्ता और मनोचिकित्सक
इस संबंध में यहां के प्रमुख शोधकर्ता उमेश शर्मा ने बताया है कि संन्यासी विद्रोह के दौरान देवी चौधरानी तथा भवानी पाठक की बड़ी भूमिका रही. ये लोग अंगरेजों से लड़े. बैकुंठपुर इलाके के लोग दोनों को देवता के हिसाब से ही पूजते हैं. संभवत: इसी वजह से किसान गोल्टू राय ने दोनों की प्रतिमा स्थापित की है. सरकारी मनोचिकित्सक स्वस्तिक शोभन चौधरी का कहना है कि किसान गोल्टू राय ने देवी चौधरानी तथा भवानी पाठक के इतिहास को पढ़ा है. इसके साथ लोगों की परंपरा भी जुड़ी हुई है. संभवत: इसी से प्ररित होकर गोल्टू राय ने दोनों की मंदिर बना दी.
पर्यटन बढ़ने की संभावना
इन दोनों मंदिरों के बढ़ जाने के बाद स्थानीय लोगों ने यहां पर्यटन में वृद्धि की संभावना जतायी है. गोल्टू राय मुख्य रूप से तूत की खेती करते हैं. तालमा नदी के पास ही उनकी जमीन है. यहीं पर दोनों मंदिर बनाये गये हैं. यहां का प्राकृतिक वातावरण काफी अच्छा है. पूजा-पाठ के लिए भक्त यहां आने भी लगे हैं.

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Read More

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >