आपको ही बचाये रखनी है दार्जिलिंग चाय की पहचान

जीटीए चीफ विमल गुरूंग भी मौजूद थे गुरूंग ने कहा, दार्जिलिंग के नाम पर बिक रही नेपाली चाय दार्जिलिंग : गुरुवार को स्थानीय गोरखा रंगमंच भवन में दार्जिलिंग टी एसोसिएशन (डीटीए) की वार्षिक बैठक में राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे. उनके अलावा राज्यपाल केशरीनाथ त्रिपाठी, राज्य के पयर्टन मंत्री गौतम […]

जीटीए चीफ विमल गुरूंग भी मौजूद थे
गुरूंग ने कहा, दार्जिलिंग के नाम पर बिक रही नेपाली चाय
दार्जिलिंग : गुरुवार को स्थानीय गोरखा रंगमंच भवन में दार्जिलिंग टी एसोसिएशन (डीटीए) की वार्षिक बैठक में राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे. उनके अलावा राज्यपाल केशरीनाथ त्रिपाठी, राज्य के पयर्टन मंत्री गौतम देव, जीटीए चीफ विमल गुरूंग और डीटीए के चेयरमैन एस एस बडिया, डीटीए के उप चेयरमैन वी के मोहन आदि उपस्थित थे. बैठक को सम्बोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि यूरोपियन देशों में दार्जिलिंग की चाय की एक अलग पहचान है. उन्होंने इस पहचान को यथावत बनाये रखने की अपील की.
वहीं अपने संबोधन में जीटीए चीफ विमल गुरूंग ने कहा कि दार्जिलिंग चाय के नाम पर दूसरी जगहों की चाय बेची जा रही है. उन्होंने इसके लिए पड़ोसी देश नेपाल का सीधे-सीधे नाम लिया. श्री गुरूंग ने कहा कि यह सब बंद करना होगा.
मुख्यमंत्री के कदम से आहत हूं : गुरूंग
अपने संबोधन में विमल गुरूंग ने कहा कि बुधवार सुबह जीटीए की टोली मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से मिली थी. हमारी अच्छे माहौल में बात हुई. लेकिन दोपहर को भानुभक्त जयंती समारोह में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने गोरखा लोगों को बांटने के लिए और विकास बोर्डों की घोषणा कर दी. यह अच्छी बात नहीं है. मुख्यमंत्री की इस कार्यनीति से मैं आहत हूं.
इसके कारण राष्ट्रपति द्वारा बुलाये गये रात्रिभोज में भी मैं शरीक नहीं हो सका. उन्होंने कहा कि मुझे जनमत के जरिये जीटीए चीफ के पद में बिठाया गया है, परंतु राज्य सरकार के कार्यक्रम में मुझे बोलने का मौका तक नहीं दिया गया.

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