कालिम्पोंग विस सीट: गोरखालैंड बनाम अलग जिले की लड़ाई

सिलीगुड़ी: वर्ष 2011 के विधानसभा चुनाव में कालिम्पोंग सीट से गोजमुमो के टिकट पर एक लाख 24 हजार 885 वोट में से एक लाख नौ हजार 102 वोट अकेले लेकर जीत हासिल करने वाले हर्क बहादुर छेत्री इस बार गोजमुमो के ही गले की हड्डी बने हुए हैं. कुछ महीने पहले बिमल गुरूंग से मतभेद […]

सिलीगुड़ी: वर्ष 2011 के विधानसभा चुनाव में कालिम्पोंग सीट से गोजमुमो के टिकट पर एक लाख 24 हजार 885 वोट में से एक लाख नौ हजार 102 वोट अकेले लेकर जीत हासिल करने वाले हर्क बहादुर छेत्री इस बार गोजमुमो के ही गले की हड्डी बने हुए हैं. कुछ महीने पहले बिमल गुरूंग से मतभेद होने के बाद हर्क बहादुर छेत्री ने गोजमुमो को अलविदा कह दिया था और वह अपनी पार्टी जाप के नाम पर कालिम्पोंग से विधानसभा का चुनाव लड़ रहे हैं.

कालिम्पोंग में इस बार अद्भूत चुनावी समीकरण बन रहा है. इससे पहले के अधिकांश विधानसभा चुनावों में यहां सबसे बड़ा चुनावी मुद्दा गोरखालैंड हुआ करता था. कालिम्पोंग में इस बार अलग गोरखालैंड राज्य के साथ ही अलग कालिम्पोंग जिला भी एक मुख्य चुनावी मुद्दा है. हर्क बहादुर छेत्री कालिम्पोंग को अलग जिला बनाना अपनी सबसे बड़ी उपलब्धि मान रहे हैं. इसी को मुख्य मुद्दा बनाकर वह चुनाव मैदान में उतरे हुए हैं. तृणमूल कांग्रेस ने पहले उन्हें अपना उम्मीदवार बनाया था. इसका उन्हें उल्टे नुकसान होते नजर आया. उम्मीदवारी घोषित होने के 24 घंटे के अंदर ही उन्होंने पल्टी मारी और तृणमूल के टिकट पर चुनाव लड़ने से इंकार कर दिया. वह अपनी पार्टी के टिकट पर ही चुनाव लड़ रहे हैं. हालांकि तृणमूल कांग्रेस उनका समर्थन कर रही है. तब तक जो नुकसान होना था, वह हो चुका. गोजमुमो हर्क बहादुर छेत्री को अपना सबसे बड़ा चुनावी दुश्मन मान रही है. गोजमुमो सुप्रीमो बिमल गुरूंग तथा अन्य नेता जोर-शोर से इस मुद्दे को उठा रहे हैं. बिमल गुरूंग का कहना है कि हर्क बहादुर छेत्री शुरू से ही तृणमूल कांग्रेस के एजेंट रहे हैं. तृणमूल कांग्रेस द्वारा उनको टिकट दिये जाने से यह साबित हो चुका है.

कालिम्पोंग में इस बात का असर भी देखने को मिल रहा है. पहले जो लोग हर्क बहादुर छेत्री के समर्थन में खड़े थे अब वही लोग तृणमूल कांग्रेस का नाम सामने आने से भड़के हुए हैं. कालिम्पोंग में अभी सभी पार्टियों के उम्मीदवारों की स्थिति स्पष्ट नहीं है. कांग्रेस तथा वाम मोरचा के उम्मीदवार इस सीट से चुनाव नहीं लड़ेंगे. इन दलों ने गोजमुमो के समर्थन की घोषणा की है. माकपा के जिला सचिव जीवेश सरकार का कहना है कि तृणमूल तथा उनके समर्थक पार्टियों को हराने के लिए सिर्फ दार्जिलिंग पर्वतीय क्षेत्र ही नहीं, बल्कि पूरे राज्य में भाजपा तथा तृणमूल विरोधी गठबंधन बनाकर चुनाव लड़ रहे हैं. उनकी पार्टी ने पहाड़ पर गोजमुमो के समर्थन का निर्णय लिया है.
क्या है आंकड़ा
कालिम्पोंग विधानसभा सीट से हर्क बहादुर छेत्री दूसरी बार विधानसभा में पहुंचने की कोशिश करेंगे. वर्ष 2011 में वह इस सीट से गोजमुमो के टिकट पर चुनाव जीत चुके हैं. इससे पहले लगातार तीन चुनावों 1996, 2001 तथा 2006 में इस सीट से सुभाष घीसिंग के नेतृत्व वाली गोरामुमो के गोलेन लेप्चा की जीत हुई थी.
2011 का चुनाव परिणाम
हर्क बहादुर छेत्री – गोजमुमो- 109102 वोट
प्रकाश दहाल- गोरामुमो- 7427 वोट
शांति कुमार शर्मा – कांग्रेस- 3399 वोट
बिक्रम छेत्री- माकपा- 3105 वोट
त्रिभुवन राई- अभागोली- 1852 वोट
क्या बनेगा समीकरण : कालिम्पोंग में मुख्य मुकाबला हर्क बहादुर छेत्री तथा गोजमुमो उम्मीदवार के बीच होगा. गोजमुमो ने अभी तक अपने उम्मीदवारों की घोषणा नहीं की है. कालिम्पोंग में हर्क बहादुर के खिलाफ गोरखा राष्ट्रीय कांग्रेस के अमर लुक्सम ही अब तक मैदान में हैं. गोजमुमो प्रमुख बिमल गुरूंग अपने उम्मीदवारों की घोषणा कल शनिवार को करेंगे. पहाड़ पर जो समीकरण बन रहा है, उसके अनुसार गोजमुमो को कांग्रेस के अलावा वाम मोरचा के साथ ही भाजपा का भी समर्थन मिलेगा. गोजमुमो सुप्रीमो बिमल गुरूंग का कहना है कि उन्हें माकपा का समर्थन नहीं चाहिए. उनकी पार्टी भाजपा के साथ मिलकर चुनाव लड़ रही है. इससे साफ जाहिर है कि भाजपा भी कालिम्पोंग में अपने उम्मीदवार नहीं उतारेगी. मुख्य मुकाबला पूरी तरह से गोजमुमो और हर्क बहादुर के बीच होने की संभावना है.

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