जलपाईगुड़ी : जलपाईगुड़ी का कराटे प्रशिक्षक कैलाश बर्मन की पढ़ाई आर्थिक तंगी के कारण बीच में ही छूट गयी. उसकी मां दिहाड़ी मजदूरी करती थी. इसलिए वह अपने मामा के घर पर रहकर पढ़ाई करता था. वह आर्थिक तंगी के कारण कॉलेज की पढ़ाई बीच में ही छोड़कर एक निजी कंपनी नौकरी करने लगा. लेकिन उसमें समाज सूधार का जज्बा भरा था.
इससे प्रेरित होकर उसने छात्र-छात्राओं को कराटे सीखाने का बीड़ा उठाया. सोमवार वह सौ से अधिक स्कूलों व संगठनों में लड़के लड़कियों को कराटे सिखाकर आत्मरक्षा के लिए तैयार कर रहा है. उसका लक्ष्य लड़कियों को स्वावलंबी बनाकर समाज से दुष्कर्म व छेड़छाड़ जैसी गंदगी को जड़ से मिटाना है.
कैलाश बर्मन छोटे से ही कराटे सीखा करता था. इसलिए उसने समाज व देश के लिए कुछ करने का इसे ही जरिया बना लिया. वह वर्तमान में द्वितीय स्तर का ब्लैकबेल्ट के साथ ही राष्ट्रीय स्तर का निर्णायक मंडली में भी शामिल है.
उसने बताया कि निर्धनता के साथ लड़ाई करते हुए दुष्कर्म मुक्त समाज गठन का सपना देखता है व इसके लिए काम कर रहा है. उसने बताया कि उसे कई बार रात के अंधेरे में उसपर हमले भी हुए. कई बार उसे जान से मारने की धमकी मिली है.
लेकिन इन सबको पछाड़ते हुए वह लगातार अपना प्रशिक्षण का काम जारी रखा है. उसने बताया कि वह जापान में जाकर अंतिम प्रशिक्षण लेना चाहता है. ताकी बच्चों को वह जापानी तकनीक भी सिखा सकें. लेकिन आर्थिक तंगी उसके रास्ते में एक बड़ी बाधा है.
जिला प्रमुख संरक्षक डॉ. कृष्ण देव ने बताया कि कराटे को अंतराष्ट्रीय खेल में शामिल किया गया है. हमारे देश व राज्य स्तर के खेल प्रतियोगिता में भी कराटे को शामिल करना चाहिए. उन्होंने बताया कि राज्य सरकार की ओर से नौवीं कक्षा की छात्राओं को आत्मरक्षा के कौशल के तौर पर कराटे सिखाया जाता है.
लेकिन इसे सभी कक्षाओं में शामिल करना उचित रहेगा. उन्होंने कैलाश बर्मन के बारे में कहा कि वह जलपाईगुड़ी का गौरव है. निर्धनता के साथ संघर्षपूर्ण जीवन बिताते हुए भी उसने समाज सेवा में खुद को समर्पित किया है.
