इस्लामपुर : दाड़ीभीट हाई स्कूल गोलीकांड की घटना को हुए 10 रोज बीत चुके हैं, लेकिन अभी भी वहां के हालात सामान्य नहीं हो सके हैं. मंगलवार को भी दाड़ीभीट में सन्नाटा और गहरे शोक का माहौल देखा गया. सुबह-सुबह दुकानें खुलती जरूर हैं, लेकिन शाम ढलते ही शटर और झांप गिर जाते हैं.
एक अज्ञात भय सभी के मन में समाया हुआ है. लोग शाम होते ही अपने घरों में दुबक जाते हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि अभी भी वे लोग सुरक्षित महसूस नहीं कर रहे हैं. अंधेरा छाते ही कई अज्ञात लोगों का आना-जाना शुरु हो जाता है. वहीं दाड़ीभीट हाई स्कूल बंद है.
प्रशासन ने कई बार स्कूल खुलवाने की कोशिश की, लेकिन हर बार मृत परिवार के लोगों ने ऐसा करने से तब तक रोक दिया है जब तक की गोलीकांड की जांच सीबीआई से कराने का आदेश नहीं दिया जाता. दोनों पूर्व छात्रों की मौत से स्थानीय लोग इतने गमजदा हैं कि इस बार दुर्गा पूजा नहीं मनाने का फैसला किया है.
दाड़ीभीट हाई स्कूल के मुख्य गेट पर ताला जड़कर दोनों मृत छात्रों के परिवारवालों ने धरना दे दिया है. मृत तापस बर्मन की मां मंजू बर्मन ने स्पष्ट तौर पर कहा है कि यह आंदोलन केवल उनका नहीं रह गया है, यह हजारों राजेश और तापस की माताओं का आंदोलन है.
इसलिए सीबीआई जांच के बिना स्कूल किसी भी कीमत पर नहीं खुलेगा. दूसरी ओर परिवार के लोग राष्ट्रपति से न्याय की गुहार लगाने के लिए दिल्ली गये हुए हैं. दोनों मृत पूर्व छात्रों के शवों को जांच की उम्मीद में दफना कर रखा गया है. जहां उन्हें दफनाया गया है उस जगह की पहरेदारी परिवार और ग्रामीण रात-दिन कर रहे हैं.
