सिलीगुड़ी : एक ओर जहां राज्य सरकार वाम मोर्चा के कब्जे वाली सिलीगुड़ी नगर निगम को दरकिनार करने की कोशिश में लगी है वहीं दूसरी ओर माकपा ने भी राज्य सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. सिलीगुड़ी में पिछले कुछ दिनों से तृणमूल तथा माकपा के बीच राजनीतिक पारा उफान पर है. सिलीगुड़ी नगर निगम को दरकिनार कर शहर के विकास की जिम्मेदारी एसजेडीए तथा उत्तर बंगाल विकास मंत्रालय ने ले ली है.
इसी माहौल के बीच मंगलवार को माकपा ने एसजेडीए के खिलाफ ही मोर्चा खोल दिया. माकपा ने आज फुलेश्वरी नदी तथा जोड़ापानी नदी बांण् मरम्मत की मांग को लेकर एसजेडीए का घेराव किया. माकपा का आरोप है कि वर्ष 2011 के बाद से लेकर अबतक इन दोनों नदियों के संस्कार के नाम पर 9 करोड़ रूपये डकार लिये गये हैं.
वास्तविकता यह है कि इन दोनों नदियों से एक कुदाल मिट्टी भी नहीं निकाली गयी. हल्की बारिश से ही नदी संलग्न इलाकों में पानी भर जाता है. इसको लेकर माकपा की ओर से मंगलवार को एसजेडीए के सीइओ को एक ज्ञापन भी सौंपा गया. इससे पहले मेयर पारिषद सदस्य तथा माकपा नेता शंकर घोष के नेतृत्व पार्टी कर्मी रैली लेकर हिलकार्ट रोड स्थित एसजेडीए के कार्यालय पहुंचे. वहां सीइओ को ना पाकर पार्टी की ओर से धरना प्रदर्शन किया गया.
ज्ञापन देने के बाद पत्रकारों से शंकर घोष ने बताया कि जब अशोक भट्टाचार्य एसजेडीए के चेयरमेन थे, तो उस वक्त उन्होंने फुलेश्वरी तथा जोड़ापानी नदी को महानंदा एक्शन प्लान के साथ जोड़ा था.उस समय दोनों नदियों में बांध निर्माण के साथ संस्कार के और भी कई कार्य किये गये थे. वर्ष 2011 के बाद एसजेडीए के चेयरमैन डॉ रूद्रनाथ भट्टाचार्य के रहने के दौरान 200 करोड़ रूपये का घोटाला हुआ. जिसमें फुलेश्वरी तथा जोड़ापानी नदी के संस्कार मद में आवंटित 9 करोड़ रूपये का घपला किया गया .
उनका आरोप है कि घोटाले के बाद आज तक उन नदियों से एक कुदाल मिट्टी भी नहीं निकाली गयी है. जिससे हल्कि बारिश में ही नदी संलग्न इलाके में पानी जम जाता है. उन्होंने एसजेडीए के वर्तमान चेयरमैन पर तंज कसते हुए कहा कि जब नदी संलग्न इलाके में लोगों के घरों में पानी प्रवेश करता है तो कोई नहीं जाता. लेकिन सड़क पर पानी जमते ही चेयरमैन उसके निरीक्षण करने के लिए पहुंच जाते है. इन सभी समस्याओं के समाधान की मांग पर ही मंगलवार को एसजेडीए के सीइओ को ज्ञापन सौंपा गया. श्री घोष ने बताया कि सीइओ ने उन्हें जांच का आश्वासन दिया है.
