दलाल-राज के खात्मे की पहल, टिकट काउंटर से लेकर मुर्दाघर तक लगेंगे कैमरे

सिलीगुड़ी : उत्तर बंगाल मेडिकल कॉलेज में दलालों ने अपना राज कायम कर रखा है. इस दलाल-राज को समाप्त करने के लिए उत्तर बंगाल मेडिकल कॉलेज प्रबंधन ने पुलिस के साथ मिलकर कदम बढ़ाया है. अब टिकट काउंटर से लेकर मुर्दाघर तक सीसीटीवी कैमरे लगाने का निर्णय लिया गया है. इसके अतिरिक्त मेडिकल कॉलेज के […]

सिलीगुड़ी : उत्तर बंगाल मेडिकल कॉलेज में दलालों ने अपना राज कायम कर रखा है. इस दलाल-राज को समाप्त करने के लिए उत्तर बंगाल मेडिकल कॉलेज प्रबंधन ने पुलिस के साथ मिलकर कदम बढ़ाया है. अब टिकट काउंटर से लेकर मुर्दाघर तक सीसीटीवी कैमरे लगाने का निर्णय लिया गया है. इसके अतिरिक्त मेडिकल कॉलेज के सभी डॉक्टरों, नर्सिंग स्टॉफ व अन्य कर्मचारियों को पहचान पत्र मुहैया कराया जायेगा. बुधवार को उत्तर बंगाल मेडिकल कॉलेज में रोगी कल्याण समिति की बैठक में यह निर्णय लिया गया है.
उत्तर बंगाल मेडिकल कॉलेज व अस्पताल कहने को तो सरकारी है, लेकिन करीब-करीब हर परिसेवा के लिए वैध या अवैध शुल्क देना होता है. यहां तक कि पोस्टमार्टम के बाद शवों को सिलने, गाड़ी में रखने के लिए भी मुर्दाघर के कर्मचारियों को रुपया देना पड़ता है. साधन संपन्न लोग इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज से दूर रहना पसंद करते हैं. यहां अधिकतर गरीब परिवार ही इलाज के लिए आते हैं. ऐसे लोगों को लूटने के लिए यहां दलाल तैयार बैठे रहते हैं.
दलालों का उत्पात इतना बढ़ गया है कि शिकायतें अब मेडिकल कॉलेज प्रशासन तक पहुंचने लगी हैं.रोगी कल्याण समिती के चेयरमैन डॉ रुद्रनाथ भट्टाचार्य ने बताया कि कई रोगियों के परिजनों ने उनसे निजी तौर पर शिकायत की है. मेडिकल कॉलेज की शिकायत पेटी में आरोप से भरे कई पत्र मिले हैं. दलाल गिरोहों के साथ मेडिकल कॉलेज कर्मचारियों की मिलीभगत की ओर भी उन्होंने इशारा किया है. उन्होंने कहा कि बाहरी दलालों से ज्यादा खतरनाक मेडिकल परिसर के दलाल हैं. इन्हें रुपया न मिलने पर रोगी के साथ अनदेखी की भी संभावना रहती है. पहले इन्हें सुधारनाआवश्यक है.
बुधवार को करीब पांच घंटा चली बैठक में काफी देर तक इस मसले पर चर्चा हुई. बैठक के बाद डॉ भट्टाचार्य ने बताया कि दलालों पर नकेल कसने के लिए पुलिस के साथ मिलकर एक विजिलेंस टीम तैयार करने का निर्णय लिया गया है. यह टीम मेडिकल परिसर के दलालों पर विशेष निगरानी रखेगी. औचक निरीक्षण भी किया जायेगा.
दोषी पाये जाने पर कड़ी कार्रवाई की जायेगी. श्री भट्टाचार्य ने कहा कि किसी की मौत की स्थिति में परिजनों की मानसिकता खराब रहती है. ऐसे में उनसे रुपया लेना मानवता के खिलाफ है. मेडिकल कॉलेज में प्रथम चरण में 150 सीसीटीवी कैमरे लगाये जा चुके हैं. 200 और सीसीटीवी कैमरे लगाने का अनुमति स्वास्थ्य विभाग से मिली है.
अगले महीने से सीसीटीवी लगाने का कार्य भी शुरू किया जायेगा. इसके अतिरिक्त 13 निश्चय यान (गर्भवती महिलाओं के लिए एंबुलेंस) और सात एंबुलेंस मेडिकल कॉलेज के लिए और छह सिलीगुड़ी जिला अस्पताल के लिए आवंटित किये गये हैं. एक प्रशिक्षित नर्स भी निश्चय यान में होगी. गर्भवती महिलाओं के लिए विशेष रूप से तैयार इस यान में प्रसव कराने की भी पूरी व्यवस्था है.
रोगी कल्याण समिति की बैठक में लिया गया फैसला
डॉ भट्टाचार्य ने कहा कि मेडिकल कॉलेज व सिलीगुड़ी जिला अस्पताल परिसर में निजी एंबुलेंस की पार्किंग को पूरी तरह के बंद करने का निर्णय लिया है. रोगी को उतारने के बाद निजी एंबुलेंस परिसर से बाहर खड़ी होगी. इस पर निगरानी के लिए पुलिस को निर्देश दिया गया है. इसके अतिरिक्त एक 10 बेडवाला एक अत्याधुनिक लेबर रूम जुलाई महीने से शुरू कर दिया जायेगा.
रोगियों के परिजनों के लिए एक नाइट शेल्टर बनाया जायेगा. इसके लिए जमीन चिह्नित किया जा चुका है. इस शेल्टर में 100 लोगों के रात गुजारने की व्यवस्था रहेगी. मेडिकल कॉलेज व सरकारी अस्पतालों का कपड़ा, बेड की चादर आदि की सफाई करने के लिए एक मैकानाइज्ड लॉण्ड्री बनाने का निर्णय भी लिया गया है. लॉण्ड्री के लिए जमीन का चुनाव भी कर लिया गया है. डीपीआर तैयार कर स्वास्थ विभाग को भेजा जायेगा.
आया को लेकर मेडिकल प्रशासन परेशान
सरकारी अस्पताल व मेडिकल कॉलेज में रात के समय रोगियों की देखभाल के लिए परिवारवाले खर्च देकर आया रखते हैं. हालांकि मेडिकल प्रशासन इन आयाओं की गतिविधियों से परेशान हो गया है. इन्हें नियंत्रित करने के लिए मेडिकल प्रशासन ने विचार-विमर्श शुरू किया है. बाहरी आया की वजह से सुरक्षा व्यवस्था में चूक रह जाती है. इन्हें नियंत्रित करने को लेकर भी बैठक में चर्चा हुई है.

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