कोलकाता : राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ के शाखा संगठन के रूप में अल्पसंख्यकों के बीच काम कर रहे मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के प्रति लोगों का रूझान बढ़ रहा है. शनिवार को कुछ ऐसा ही मेरिन क्लब के सभागार में दिखा, जहां मंच की ओर से पैगामे इंसानियत के नाम पर एक जलसे का आयोजन किया गया था. इसमें मुख्य वक्ता को रूप में इंद्रेश कुमार उपस्थित थे.
कार्यक्रम में लोगों को बुलाने की जिम्मेदारी इरशाद अहमद की थी. बड़ी संख्या में मंच पर जहां मौलाना और मौलवी नजर आये, तो सुनने के लिए मंच के नीचे अल्पसंख्यक लोगों की बड़ी तादाद नजर आयी. इंद्रेश कुमार ने कहा कि स्वाधीनता के इतने साल बाद भी अल्पसंख्यक समुदाय को सरकार ने क्या दिया. उनके निशाने पर केंद्र और राज्य सरकारें थीं.
उन्होंने कहा कि यहां के मुसलमान पहले कांग्रेस का समर्थन करते रहे. फिर वामपंथियों और अब ममता बनर्जी की सरकार यानी तृणमूल कांग्रेस के साथ हैं. इन्होंने खुलकर सच्चे दिल से इनका साथ दिया, लेकिन सवाल उठता है कि बदले में इन लोगों ने इन्हें क्या दिया. क्या बेहतर तालीम मुस्लिमों को मिल रही है. रोजगार में उनका स्थान सुनिश्चित है. उनके रहन-सहन का स्तर सुधारा है. अगर नहीं, तो यह सवाल पूछना चाहिए. इन्हीं के कहने पर मुस्लिम आरएसएस से नफरत करते रहे हैं.
आरएसएस को गाली देने से नहीं सुधर सकती हालत : इंद्रेश
इंद्रेश कुमार ने कहा कि अगर आरएसएस को गाली देने से अल्पसंख्यकों की माली हालत सुधरती, उन्हें रोजगार मिलता तो हमें कोई एतराज नहीं होता, लेकिन ऐसा हो नहीं रहा.
उन्होंने कहा कि जब सच्चर कमेटी ने भारतीय अल्पसंख्यकों की वास्तविक स्थिति का खुलासा कर सिफारिश की, तो हजारों करोड़ों रुपये उनके नाम पर बहाये गये. लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ.
मौके पर मुरारी दास, विशाल अहमद, सैय्यद मंजूर साहिल, नियाज अली उर्फ राजा, निजाम, मौलाना सैय्यद कोनैन अहमद के अलावा अरशद आलम, नाजिया इलाही खान, चांद बेगम के अलावा तीन तलाक के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट जानेवालीं इशरत जहां भी मौजूद रहीं.
