विरोध: नामांकन को लेकर सिलीगुड़ी कॉलेज में बवाल, माहौल गरम, बुलानी पड़ी पुलिस
सिलीगुड़ी: सिलीगुड़ी कॉलेज में ऑनर्स में नामांकन को लेकर उस समय माहौल गरम हो गया, जब ऑनलाइन नामांकन में धांधली का आरोप लगाते हुए भारी संख्या में विद्यार्थी यहां विरोध प्रदर्शन करने लगे. स्थिति को तनावपूर्ण होते देख कॉलेज कर्मचारियों ने इसकी जानकारी प्रिंसिपल सुजीत घोष को दी. उसके बाद श्री घोष ने स्थिति को […]
सिलीगुड़ी: सिलीगुड़ी कॉलेज में ऑनर्स में नामांकन को लेकर उस समय माहौल गरम हो गया, जब ऑनलाइन नामांकन में धांधली का आरोप लगाते हुए भारी संख्या में विद्यार्थी यहां विरोध प्रदर्शन करने लगे. स्थिति को तनावपूर्ण होते देख कॉलेज कर्मचारियों ने इसकी जानकारी प्रिंसिपल सुजीत घोष को दी. उसके बाद श्री घोष ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए सिलीगुड़ी थाने को खबर किया. सूचना मिलते ही भारी संख्या में पुलिस बल मौके पर पहुंची और विरोध प्रदर्शन कर रहे छात्रों को कॉलेज परिसर से खदेड़ दिया.
उसके बाद वहां का माहौल और गरम हो गया. कॉलेज के बाहर विद्यार्थी विरोध प्रदर्शन करने लगे. आंदोलनकारियों का कहना है कि वह लोग किसी प्रकार का कोई हंगामा नहीं कर रहे थे. उसके बाद भी कॉलेज के प्रिंसिपल ने बेवजह पुलिस को बुला लिया. वास्तविकता यह है कि वह लोग किसी प्रकार का हंगामा नहीं करना चाहते, बल्कि सभी छात्र-छात्राओं को ऑनर्स में नामांकन मिल सके, यह चाहते हैं. एक आंदोलनकारी छात्र ने बताया कि सिलीगुड़ी कॉलेज सहित आसपास के सभी कॉलेजों में ऑनर्स की कितनी सीट है, इसकी जानकारी नहीं दी जा रही है.
भारी संख्या में छात्र-छात्राएं नामांकन के लिए ऑनलाइन आवेदन कर रहे हैं. वह निश्चित नहीं हैं कि आवेदन करने के बाद उनका नामांकन हो ही जायेगा. कॉलेज प्रबंधन को पहले से ही सीटों की जानकारी देनी चाहिए थी, ताकि कम अंकों वाले नामांकन के लिए दूसरे कॉलेजों में भी आवेदन कर सके. विरोध प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने कुछ विषयों की पढ़ाई में लगने वाली फीस के भुगतान में किश्तों की सुविधा भी देने की मांग की. मास कम्युनिकेशन, कंप्यूटर साइंस आदि जैसे कई विषय में फीस काफी अधिक है.
एक-एक सेमेस्टर में 16 से 17 हजार रुपये देने पड़ते हैं. कॉलेज के प्रिंसिपल से इस फीस के भुगतान में विद्यार्थियों को किश्तों की सुविधा देने की मांग की है. इन्हीं तमाम बातों को लेकर वह लोग कॉलेज प्रबंधन से बातचीत करने गये थे. प्रिंसिपल ने मिलने तक से इंकार कर दिया और उलटे पुलिस की मदद से सभी को बाहर खदेड़ दिया. इधर, प्रिंसिपल सुजीत घोष का कहना है कि हंगामा करने वाले विद्यार्थी बाहरी थे. पहले उन्हें कॉलेज परिसर से जाने के लिए कहा गया. उसके बाद भी जब सभी हंगामा करते रहे, तो पुलिस की सहायता लेनी पड़ी.