सिलीगुड़ी: चाय श्रमिकों की पुरानी मांग को लेकर उत्तर बंगाल चाय मजदूर अधिकार मंच ने फिर से अपनी आवाज उठायी है. बुधवार दोपहर संगठन की ओर से सिलीगुड़ी महकमा शासक के मार्फत राज्य के खाद्य मंत्री ज्योतिप्रिय मल्लिक व श्रम मंत्री मलय घटक को ज्ञापन सौंपा गया है. न्यूनतम मजदूरी अधिनियम के तहत चाय श्रमिकों का वेतन तय नहीं करने पर जोरदार आंदोलन की धमकी दी है.
यहां उल्लेखनीय है कि उत्तर बंगाल के चाय श्रमिकों की वर्षों पुरानी मांग न्यूनतम वेतन अभी भी फाइलों में बंद है. श्रमिकों की बदहाल स्थिति से उत्तर बंगाल का चाय उद्योग झुलस गया है. चाय श्रमिकों की मांग पर तवज्जो नहीं दी जा है. बुधवार को उत्तर बंगाल चाय मजदूर अधिकार मंच के अध्यक्ष जॉन गॉर्डन एक्का व सचिव जेरोम लाकड़ा के नेतृत्व में सिलीगुड़ी के हिलकर्ट रोड स्थित विवेकानंद भवन में सिलीगुड़ी महकमा शासक कार्यालय का घेराव किया गया. संगठन के एक प्रतिनिधि दल ने चार सूत्री मांगों सहित एक ज्ञापन सौंपा.
संगठन के नेताओं का कहना है कि न्यूनतम मजदूरी अभी तक तय नहीं की गयी है. अब बिना समय गवाएं न्यूनतम मजदूरी तय करनी होगी. प्रत्येक चाय बागानों में खाद्य सुरक्षा कानून को लागू कराना होगा. अभी भी बागान श्रमिक खाद्य सुरक्षा योजना से वंचित हो रहे हैं. इनलोगों ने आरोप लगाया कि सब्सिडी पर राशन देना बंद कर दिया गया है. इसलिये मजदूरों को राशन के एवज में नगद राशि मिलनी चाहिए. अवकाश प्राप्त कर चुके श्रमिकों को ग्रेच्युटी, पीएफ आदि अन्य सभी सुविधाएं देनी होगी.
संगठन के अध्यक्ष जॉन गॉर्डन एक्का ने बताया कि अलग राज्य की मांग पर जब पहाड़ अग्निगर्भ है तब राज्य सरकार बातचीत करने को तैयार है. वहां शांति व्यवस्था के लिये हर संभव प्रयास के लिए सरकार तैयार है. जबकि 1948 में न्यूनतम मजदूरी एक्ट पास होने के बाद भी उत्तर बंगाल के चाय श्रमिकों की मांग फाइलों में कैद है. उन्होंने कहा कि चाय श्रमिकों का हक अतिशीघ्र नहीं मिलने पर संगठन की ओर से जोरदार आंदोलन होगा.
