आसनसोल का दिल व विश्वास जीता, तभी फिर से प्रत्याशी चुना गया, बोले बिहारी बाबू शत्रुघ्न सिन्हा

आसनसोल के सांसद और बिहारी बाबू के नाम से मशहूर फिल्म अभिनेता शत्रुघ्न सिन्हा ने अपनी उपलब्धियों का जिक्र करते हुए कहा कि यहां के लोगों का दिल जीत सका, विश्वास जीत सका.

आसनसोल के सांसद और बिहारी बाबू के नाम से मशहूर फिल्म अभिनेता शत्रुघ्न सिन्हा ने अपनी उपलब्धियों का जिक्र करते हुए कहा कि यहां के लोगों का दिल जीत सका, विश्वास जीत सका. यही वजह है कि बंगाल ही नहीं, पूरे देश में इस बार लोकसभा चुनाव के लिए जिस पहले उम्मीदवार के नाम की घोषणा हुई, वह शत्रुघ्न सिन्हा व आसनसोल के प्रतिनिधि के नाम की हुई.

उन्होंने कहा कि दूसरी बड़ी उपलब्धि यह रही कि ढाई साल के दौरान एमपी फंड के सारे पैसे, साढ़े बारह करोड़ रुपये का सही तरीके से उपयोग हुआ. इसमें पूर्व सांसद बाबुल सुप्रियो का भी कुछ फंड शामिल है. इसके अलावा प्रधानमंत्री नेशनल रिलीफ फंड से करीब सवा करोड़ रुपये से कैंसर के मरीजों का उपचार करवाया गया.

आसनसोल में हुआ सबसे ज्यादा कैंसर मरीजों का इलाज : शत्रुघ्न

शत्रुघ्न सिन्हा ने कहा कि संभवतः देश के सारे संसदीय क्षेत्र में आसनसोल ही एक ऐसा है, जहां इतने सारे कैंसर मरीजों का इलाज कराया गया. इस मामले में केंद्र का आभार जताना जरूरी है. प्रधानमंत्री रिलीफ फंड के अलावा भी कुछ मामले ऐसे रहे जहां स्वास्थ्य मंत्रालय से मदद दिलाया गया. काफी खराब स्थिति में रहे एक कैंसर मरीज को स्वास्थ्य मंत्रालय से इलाज के लिए साढ़े बारह लाख रुपये दिलवाया गया.

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उपलब्धियों के बीच रही कुछ खामियां भी

श्री सिन्हा ने कहा कि इन सारी उपलब्धियों के बीच कुछ खामियां भी रही. जिस तरह संसद का सत्र चला, उससे तमाम अच्छी कोशिश और नीयत के बावजूद यहां के कोयला मजदूरों का, उनकी हालात का, आसनसोल में हो रहे विकास कार्यों हाईवे और फ्लाईओवर आदि कार्यों में सुस्ती का मुद्दा का समाधान नहीं कर सका. विकास कार्यों में जो फुर्ती होनी चाहिए थी, उसमें चुस्ती नहीं ला सका. डेढ़ साल से पार्लियामेंट नहीं के बराबर चला है, एकतरफा चला है. बोलने का मौका ही नहीं मिला. जीरो आवर में बोलने की कोशिश की तो तीन बार रिजेक्शन हो गया.

पांच बार चुनाव लड़े मलय घटक, हर बार हारे

आसनसोल लोकसभा सीट के 67 सालों के इतिहास में किसी एक उम्मीदवार द्वारा पांच बार चुनाव लड़ने का रिकॉर्ड राज्य के कानून मंत्री मलय घटक के नाम है. उन्होंने 1998 में पहली बार चुनाव लड़ा, जिसमें माकपा उम्मीदवार विकास चौधरी ने उन्हें 26,149 वोटों से हराया. वर्ष 1999 के चुनाव में माकपा के विकास चौधरी ने उन्हें फिर 37,864 वोटों के अंतर से पराजित किया.

वर्ष 2004 में माकपा उम्मीदवार विकास चौधरी ने फिर मलय घटक को 1,24,318 वोटों से मात दी. 2005 में तत्कालीन सांसद के निधन के बाद हुए उपचुनाव में माकपा उम्मीदवार बंशगोपाल चौधरी ने मलय घटक को रिकॉर्ड 2,29,941 वोटों से शिकस्त दी. सबसे अधिक वोटों के अंतर से जीत का यह रिकॉर्ड 17 साल बाद टूटा.

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तृणमूल उम्मीदवार शत्रुघ्न सिन्हा ने 2022 के उपचुनाव में भाजपा उम्मीदवार अग्निमित्रा पाल को 3,03,209 वोटों से हरा नया रिकॉर्ड बनाया. वर्ष 2009 के चुनाव में माकपा उम्मीदवार बंशगोपाल चौधरी ने मलय घटक को 72,956 वोटों के अंतर से पराजित किया. घटक पांच बार लोकसभा चुनाव लड़े, लेकिन एकबार भी नहीं जीते. हर बार दूसरे नंबर पर रहे. लोकसभा चुनाव नहीं लड़े.

दलीय स्थिति पर एक नजर

वर्ष 2019 के चुनाव में आसनसोल सीट से दूसरी बार भाजपा उम्मीदवार बाबुल सुप्रियो विजयी हुए. उन्होंने तृणमूल उम्मीदवार मुनमुन सेन को 1,97,637 वोटों से पराजित किया था. सुप्रियो को 51.16 फीसदी वोट मिले, जो पिछली बार की तुलना में 14.41 प्रतिशत की बढ़ोतरी थी.

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मुनमुन सेन को 35.19 प्रतिशत वोट मिले, जो पिछली बार के तृणमूल उम्मीदवार को प्राप्त वोटों की तुलना में 4.61 प्रतिशत अधित था. माकपा उम्मीदवार गौरांग चटर्जी को 7.08 प्रतिशत मत मिले. यह पिछली बार के माकपा उम्मीदवार को प्राप्त वोटों की तुलना में 15.31 फीसदी कम था.

विश्वरूप मंडल को कांग्रेस से 2.54 फीसदी कम वोट मिले

कांग्रेस उम्मीदवार विश्वरूप मंडल को 1.7 फीसदी वोट मिले, जो पिछली बार कांग्रेस को प्राप्त वोटों की तुलना में 2.54 फीसदी कम था. वर्ष 2022 में तृणमूल ने बड़ी छलांग लगायी. तृणमूल उम्मीदवार शत्रुघ्न सिन्हा ने भाजपा की अग्निमित्रा पाल को 3,03,209 वोटों के अंतर से पराजित किया.

श्री सिन्हा को 56.62 फीसदी वोट मिले, जो पिछली बार तृणमूल प्रार्थी को प्राप्त वोटों की तुलना में 21.43 फीसदी अधिक था. अग्निमित्रा को 30.46 फीसदी मत मिले, जो पिछली बार प्राप्त भाजपा उम्मीदवार की तुलना में 20.70 फीसदी कम था.

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माकपा के पार्थ मुखर्जी को 7.80 फीसदी वोट मिला, जो पिछली बार के चुनाव में प्राप्त माकपा उम्मीदवार की तुलना में 0.72 फीसदी अधिक था. कांग्रेस उम्मीदवार प्रसेनजीत पुईतंडी को 1.30 फीसदी वोट मिला, जो पिछली बार चुनाव में प्राप्त कांग्रेस उम्मीदवार की तुलना में 0.40 फीसदी कम रहा.

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By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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