उत्पादन में कमी, फिर भी देश का दिल जीतने को तैयार बांकुड़ा के आम

16 से 30 तक दिल्ली के मैंगो मेले में धूम मचायेंगे बांकुड़ा के आम्रपाली और मल्लिका

प्रणव कुमार बैरागी, बांकुड़ा . बंगाल में आम के लिए पहले लोग मालदा-मुर्शिदाबाद के ही नाम जपते थे. पर, अब वो बात नहीं है. आम उत्पादक जिलों की सूची में लाल मिट्टी वाला जिला बांकुड़ा भी बहुत पीछे नहीं है. हालांकि, इस बार यहां थोड़ी कठिनाई जरूर दिख रही है. दरअसल, मौसम अनुकूल नहीं होने के चलते आम के उत्पादन में इस बार कमी आयी है. फिर भी आम उत्पादकों में उत्साह की कोई खास कमी नहीं है. इस बार भी बांकुड़ा के प्रसिद्ध आम-आम्रपाली, हिमसागर और मल्लिका, देश की राजधानी नयी दिल्ली के मैंगो मेले के माध्यम से आम प्रेमियों को तृप्त करने को मानो पूरी तरह तैयार हों. पिछले करीब एक दशक की अवधि में आम उत्पादन के मामले में बांकुड़ा ने भी बंगाल के मानचित्र पर अपनी पहचान बना ली है. बांकुड़ा की लाल मिट्टी में पैदा होने वाले आम्रपाली और मल्लिका के स्वाद और सुगंध के दीवाने देश भर में हैं. मध्य पूर्व और यूरोप की धरती पर भी ऐसे लोग हैं, जो बांकुड़ा के आम के मुरीद हैं. पिछले कुछ वर्षों से बांकुड़ा के आम्रपाली और मल्लिका प्रजाति के आम ने मालदा और मुर्शिदाबाद को पछाड़ते हुए दिल्ली के आम मेले में कई पदक जीते हैं. लेकिन इस बार मौसम की प्रतिकूलता के कारण जिले भर में आम की पैदावार काफी कम है. बागवानी विभाग को उम्मीद थी कि जिले के लोगों की जरूरतों को पूरा करने के बाद आम बाहर भी भेजा जा सकता है. हालांकि, आम्रपाली और मल्लिका की खेप राज्य से बाहर भेजा भी जा रही है. 16 से 30 जून तक दिल्ली में जनपथ पर आयोजित होने वाले मैंगो मेले में बांकुड़ा के ये आम भी शामिल होने वाले हैं. बागवानी विभाग से पता चला है कि शुरुआत में दिल्ली आम मेले में सात टन आम भेजे जा रहे हैं. हां, सवाल है कि पिछले कुछ वर्षों की तरह बांकुड़ा के आम इस बार भी दिल्ली मेले में आने वालों के दिल जीत पायेंगे ? वैसे, इस बाबत सभी आशान्वित तो हैं. जिले में आम उगाने वाले सैकड़ों लोग दिल्ली के आम मेले में आम भेज कर अच्छी कीमत की आस लगाये बैठे हैं. इस बारे में डिप्टी डायरेक्टर, हॉर्टिकल्चर, देबाशीष मान्ना का कहना है कि इस बार आम के उत्पादन में कमी आयी है. पहले जहां 12 लाख मीट्रिक टन आम का उत्पादन होता था, इस बार सिर्फ छह लाख मैट्रिक टन ही हो सका है. इस बार भी बांकुड़ा के प्रसिद्ध आम्रपाली व मल्लिका आम दिल्ली मेले में भेजे जा रहे हैं. इस बार सात टन आम भेजे जा रहे हैं. इसे चार चरणों में भेजा जायेगा. सर्वाधिक जोर आम्रपाली पर ही दिया जा रहा है. 2011 से 2022 तक आम्रपाली ने लगातार लोगों का दिल जीता है. मेले में पहला स्थान प्राप्त किया. इस अधिकारी ने बताया कि आम उत्पादकों द्वारा अन्य कई किस्मों के आम भी दिल्ली ले जाये जा रहे हैं. इनमें प्रमुख हैं थाईलैंड से आने वाले फॉर्केजी, कस्तूरी, जापानी मियांजाकी, बांग्लादेशी नूरजहां, इंडोनेशियाई काठीमोन व रेड आइवरी तथा अमेरिका के बनाना मैंगो. दरअसल, बांकुड़ा के आम पूर्णतया ऑर्गेनिकली तैयार होते हैं. हॉर्टिकल्चर विभाग की असिस्टेंट डायरेक्टर डॉ पायल पांजा का कहना है कि बांकुड़ा की मिट्टी में पैदा होने वाले आम बेहद स्वादिष्ट होते हैं. उन्होंने यह भी कहा कि आम व्यवसाय को वे लोग जिले में एक नये मुकाम पर पहुंचाना चाहते हैं. अन्य फलों की खेती पर भी जोर दिया जा रहा है. विशेष फोकस फल उत्पादन को रोजगार से जोड़ने पर है. इस संबंध में लोगों को उत्साहित किया जा रहा है. आम उत्पादक किसान नित्यानंद गराई इस बात से परेशान हैं कि इस बार आम का उत्पादन अपेक्षानुरूप नहीं है. खराब मौसम ने काफी नुकसान पहुंचाया है. उत्पादन 50% से भी कम हो गया है. फिर भी उन्होंने आस नहीं छोड़ी है. मेले से कुछ न कुछ मुनाफे की उम्मीद तो है ही.

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By Prabhat Khabar News Desk

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