बंगाल की 3 राज्यसभा सीटों पर उपचुनाव में भाजपा की प्रचंड जीत तय, संसद में और कमजोर होगी तृणमूल कांग्रेस

West Bengal Rajya Sabha Bypolls: पश्चिम बंगाल की 3 राज्यसभा सीटों पर 24 जुलाई को उपचुनाव होंगे. विधानसभा में 208 विधायकों के प्रचंड बहुमत के साथ भाजपा की क्लीन स्वीप तय है, जबकि दो धड़ों में बंटी तृणमूल कांग्रेस को झटका लगना निश्चित माना जा रहा है.

West Bengal Rajya Sabha Bypolls: पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस में छिड़े सियासी घमासान के बीच निर्वाचन आयोग (Election Commission of India) ने राज्य की 3 राज्यसभा सीटों पर 24 जुलाई को उपचुनाव का ऐलान कर दिया है. इसके साथ ही संसद के उच्च सदन में बंगाल का प्रतिनिधित्व बदलने के संकेत मिल रहे हैं. मौजूदा आंकड़ों के अनुसार, इन तीनों सीटों पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की जीत तय मानी जा रही है. आंतरिक कलह से जूझ रही तृणमूल कांग्रेस (TMC) की ताकत संसद में कम होने के संकेत मिल रहे हैं.

24 जुलाई को होगी वोटिंग

निर्वाचन आयोग के कार्यक्रम के मुताबिक, इन 3 सीटों के लिए 24 जुलाई 2026 को मतदान कराया जायेगा. ये सीटें तृणमूल कांग्रेस के पूर्व राज्यसभा सांसदों सुखेंदु शेखर रॉय, सुष्मिता देव और प्रकाश चिक बड़ाईक के इस्तीफे से खाली हुई हैं. इन तीनों ही नेताओं ने विधानसभा चुनाव 2026 में तृणमूल कांग्रेस की हार के बाद पार्टी के शीर्ष नेतृत्व पर गंभीर सवाल उठाये थे. जून में तीनों ने संसद व पार्टी दोनों से अपना नाता तोड़ लिया था.

भाजपा के पास 208 विधायकों का प्रचंड बहुमत

पश्चिम बंगाल की 294 सदस्यीय विधानसभा में वर्तमान में बीजेपी के पास कुल 208 विधायक हैं. राज्यसभा चुनाव की नियमावली के तहत, इन 3 सीटों पर होने वाले उपचुनाव में किसी भी उम्मीदवार को जीतने के लिए लगभग 70 प्रथम वरीयता (First Preference) मतों की आवश्यकता होगी.

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निर्विरोध जीत सकते हैं भाजपा के तीनों उम्मीदवार

इस लिहाज से भाजपा बिना किसी अन्य दल या बैसाखी के समर्थन के अपने दम पर क्रमशः 70, 69 और 69 वोट आसानी से जुटा सकती है. पार्टी के रणनीतिकारों का कहना है कि यदि भाजपा 3 उम्मीदवार मैदान में उतारती है, तो तीनों का निर्विरोध या भारी मतों से जीतना तय है. राज्यसभा में सीटों की यह बढ़ोतरी बंगाल में भाजपा को मिले जनसमर्थन को और मजबूत करेगी.

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West Bengal Rajya Sabha Bypolls: तृणमूल कांग्रेस के अस्तित्व का संकट

यह उपचुनाव तृणमूल कांग्रेस में चल रहे ‘वर्चस्व के युद्ध’ को भी पूरी तरह उजागर करता है. कागजों पर भले ही तृणमूल के पास 80 विधायक हैं, जिससे वह एकजुट होकर कम से कम एक उम्मीदवार को जिताने का माद्दा रखती है, लेकिन हकीकत में ऐसा होता नहीं दिख रहा. तृणमूल का विधायक दल अब ममता बनर्जी समर्थित धड़े और नेता प्रतिपक्ष रीतब्रत बनर्जी के बागी धड़े के बीच विभाजित हो चुका है.

बागी गुट के पास 65 विधायक

बागी गुट को 65 विधायकों का समर्थन प्राप्त है. इन्होंने पहले ही ममता बनर्जी गुट के फैसलों को नकार दिया है. रीतब्रत बनर्जी खेमे का कहना है कि ये इस्तीफे पार्टी के मौजूदा नेतृत्व पर से जनप्रतिनिधियों के उठते भरोसे का प्रमाण हैं. दूसरी तरफ, ममता बनर्जी गुट ने इसे अधिक तवज्जो नहीं दी. उन्होंने इसे संकट के समय पार्टी छोड़ने वाले नेताओं का ‘विश्वासघात’ करार दिया.

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By Mithilesh Jha

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