बंगाल चुनाव 2026 : ममता बनर्जी का मास्टरस्ट्रोक! खेल, संताल और अल्पसंख्यक कार्ड से विपक्ष की घेराबंदी

West Bengal Election 2026: बंगाल चुनाव 2026 की तारीखों के ऐलान के बाद और पार्टी के उम्मीदवारों की लिस्ट जारी करने से पहले ममता बनर्जी ने खेल, शिक्षा और अल्पसंख्यक समुदायों के दिग्गजों को टीएमसी में शामिल करके मास्टरस्ट्रोक खेला है. शिव शंकर पॉल, तनुश्री हंसदा और मुफ्ती मतीन के जरिये टीएमसी ने उत्तर बंगाल, जंगलमहल और सीमावर्ती जिलों में विपक्ष की घेराबंदी तेज कर दी है.

West Bengal Election 2026: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के लिए मतदान में एक महीने से कुछ ही अधिक समय बचे हैं. ऐसे में तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने मंगलवार को अपनी सांगठनिक शक्ति का प्रदर्शन करते हुए 3 अलग-अलग क्षेत्रों की बड़ी हस्तियों को पार्टी में शामिल करवा लिया. फर्स्ट क्लास क्रिकेट के पूर्व तेज गेंदबाज शिव शंकर पॉल, संताली शिक्षाविद तनुश्री हंसदा और इस्लामी विद्वान मुफ्ती अब्दुल मतीन का टीएमसी में शामिल होना कोई सामान्य ज्वाइनिंग नहीं है. 294 सीटों के लिए बुना गया एक गहरा चुनावी जाल है.

शिव शंकर पॉल : खेलाश्री के बहाने युवाओं और उत्तर बंगाल पर नजर

प्रथम श्रेणी के पूर्व क्रिकेटर शिव शंकर पॉल उत्तर बंगाल के कूचबिहार और तूफानगंज में अपनी क्रिकेट अकादमियां चलाते हैं. वित्त मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य ने उन्हें पार्टी में शामिल करते हुए ‘खेलाश्री’ योजना का जिक्र किया. माना जा रहा है कि शिव शंकर पॉल के जरिये टीएमसी उत्तर बंगाल के उन युवाओं को साधने की कोशिश कर रही है, जहां पिछले चुनावों में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने बढ़त बनायी थी. खेल के मैदान से सियासत की पिच पर उतरे पॉल ‘यूथ आइकॉन’ के तौर पर ममता बनर्जी के दूत बनेंगे.

तनुश्री हंसदा : जंगलमहल और संताल वोट बैंक पर बड़ी चोट

बांकुड़ा, झारग्राम और पुरुलिया जैसे जिलों में सक्रिय तनुश्री हंसदा का टीएमसी में शामिल होना भाजपा के ‘आदिवासी कार्ड’ का जवाब माना जा रहा है. हंसदा न केवल एक सहायक प्रोफेसर हैं, बल्कि संताली लेखक संघ की कद्दावर आवाज भी हैं. उनके जरिये टीएमसी ‘जंगलमहल’ की उन सीटों को वापस पाने की जुगत में है, जहां वर्ष 2021 में भाजपा ने सेंधमारी की थी. हंसदा ने साफ कहा है कि ममता बनर्जी सरकार की प्राथमिकता हमेशा से एससी-एसटी सशक्तीकरण रही है.

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मुफ्ती अब्दुल मतीन : 86 मदरसों का प्रभाव और अल्पसंख्यक ध्रुवीकरण

इस्लामी मामलों के जानकार मुफ्ती अब्दुल मतीन उर्फ ‘मतीन साहब’ का प्रभाव 24 परगना, हावड़ा और मुर्शिदाबाद के 86 मदरसों तक है. चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूची से लाखों नाम हटाये जाने के विवाद के बीच मतीन का टीएमसी में आना, अल्पसंख्यक वोट बैंक को एकजुट रखने की कोशिश है. माकपा और कांग्रेस के अकेले लड़ने के फैसले के बाद मतीन साहब जैसे धार्मिक गुरुओं का समर्थन टीएमसी के लिए ‘वोट कटवा’ फैक्टर को कम करने में मदद करेगा.

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बंगाल में कब होगा चुनाव

पश्चिम बंगाल में विधानसभा के चुनाव अप्रैल में कराये जा रहे हैं 23 और 29 अप्रैल को दो चरणों में राज्य की 294 विधानसभा सीटों पर वोटिंग होगी. सभी 294 सीटों के लिए मतगणना 4 मई को करायी जायेगी.

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By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 30 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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