मुख्य बातें
West Bengal Budget Session: कोलकाता: बंगाल विधानसभा का बजट सत्र हंगामे के बीच शुरू हुआ. हंगामे के कारण राज्यपाल अपना पूरा अधिभाषण भी नहीं पढ़ पाये. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के तीसरे कार्यकाल की सरकार का यह आखिरी बजट है. बजट सत्र के पहले दिन राज्यपाल सीवी आनंद बोस ने अपना अभिभाषण दिया. हंगामे के कारण वो अपना पूरा अभिभाषण नहीं पढ़ पाये. राज्यपाल के संबोधन के बाद मुख्यमंत्री के आवास पर कैबिनेट बैठक की बैठक होगी. बैठक में बजट को मंजूरी दी जाएगी.
नारेबाजी के बीच हुआ राज्यपाल का अभिभाषण
राज्यपाल सीवी आनंद बोस दोपहर 12:30 बजे से कुछ ही देर पहले विधानसभा पहुंचे. उन्होंने अंबेडकर की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया. उनके साथ अध्यक्ष बिमान बनर्जी और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी थीं. इसी दौरान सत्र में नारेबाजी शुरू हो गई. शुभेंदु अधिकारी ने “भारत माता की जय” का नारा लगाया. इसके जवाब में तृणमूल विधायकों ने “जय बंगला” का नारा लगाया. नारों और जवाबी नारों के बीच, राज्यपाल ने विधानसभा में अपना भाषण शुरू किया. भारी हंगामे के बीच राज्यपाल अपना अभिभाषण बीच में ही छोड़ दिये.
मैं अब और नहीं पढूंगा
राज्यपाल ने मंत्रिमंडल द्वारा लिखित आठ पृष्ठों के भाषण के पहले तीन पृष्ठ पढ़कर ही अपना भाषण समाप्त कर दिया. उन्होंने जो आखिरी पंक्ति पढ़ी वह थी, ‘घाटाल मास्टर प्लान, जो केंद्र सरकार के कारण लंबे समय से रुका हुआ है…’ – और यहीं पर वे रुक गए. उन्होंने कहा- मैं अब और नहीं पढूंगा. भाषण समाप्त होने पर शुभेंदु अधिकारी ने राज्यपाल की सराहना करते हुए कहा- बहुत बढ़िया.
राज्यपाल ने एक भी खंड नहीं पढ़ा
विधानसभा सूत्रों के अनुसार, राज्यपाल बोस के लिए मंत्रिमंडल द्वारा लिखा गया आठ पृष्ठों का पूरा भाषण राज्य की विभिन्न परियोजनाओं की प्रशंसा से भरा हुआ था. उन आठ पन्नों में एक खंड यह भी है, जिसमें बताया गया है कि केंद्र ने एमजीएनआरईजीए योजना को क्यों रद्द किया और राज्य ने उसके स्थान पर एक नई योजना क्यों शुरू की, लेकिन राज्यपाल सीवी आनंद बोस ने इनमें से कोई भी खंड नहीं पढ़ा. उन्होंने भाषण का केवल एक अंश पढ़कर ही आसन पर बैठ गये.
महज साढ़े चार मिनट बोले राज्यपाल
इस घटना के संबंध में राज्य के विपक्षी नेता शुभेंदु अधिकारी ने कहा- मैं राज्यपाल का 45 मिनट का भाषण सुनने की उम्मीद से आया था, लेकिन उन्होंने साढ़े चार मिनट ही भाषण दिया. उन्होंने घाटाल मास्टर प्लान का दौरा किया और उसे रोक दिया. इसके लिए केंद्र सरकार को दोषी ठहराया गया है. राज्यपाल ने केंद्र सरकार पर लगाए गए अनावश्यक आरोपों को नजरअंदाज कर दिया. भाषण में बंगाल के ज्वलंत मुद्दों का जिक्र नहीं किया गया. यह उल्लेखनीय है कि केवल बंगाल ही नहीं, तमिलनाडु, कर्नाटक और केरल में भी हाल के दिनों में इसी तरह की घटनाएं देखने को मिली हैं. राज्यपाल ने उस राज्य की सरकार (कैबिनेट) द्वारा लिखित भाषण का केवल एक अंश पढ और बैठ गये.
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