बंगाल में बिक रही है बीएड की डिग्री !, 602 कॉलेजों में से 53 का कोई अस्तित्व ही नहीं

पश्चिम बंगाल में बीएड डिग्री की बिक्री के गंभीर आरोप लगे हैं. 602 निजी कॉलेजों की जांच में 53 का कोई अस्तित्व नहीं मिला. कई कॉलेजों का इंफ्रास्ट्रक्चर बेहद खराब पाया गया है.

कोलकाता से शिवशक्ति प्रसाद की रिपोर्ट

पश्चिम बंगाल में विभिन्न क्षेत्रों में स्थित 602 बीएड कॉलेजों को लेकर पश्चिम बंगाल के साथ-साथ अन्य राज्यों से भी कई प्रकार की शिकायतें आ रही हैं. पड़ोसी राज्य के मुख्य सचिव ने मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी को पत्र लिखकर बीएड कॉलेजों द्वारा दिये जा रहे प्रमाणपत्रों की जांच करने की मांग की है. इन आरोपों के साथ गुरुवार को राज्य के उच्च शिक्षा मंत्री जगन्नाथ चट्टोपाध्याय ने विभागीय अधिकारियों के साथ उच्च स्तरीय बैठक की. इससे पहले मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने स्वयं विकास भवन में शिक्षा विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक कर शिक्षा व्यवस्था की स्थिति की समीक्षा की है.

बेची जा रही है डिग्रियां

बैठक के बाद संवाददाताओं से बातचीत में जगन्नाथ चट्टोपाध्याय ने आरोप लगाया कि पिछली व्यवस्था में शिक्षा क्षेत्र में बड़े पैमाने पर अराजकता और भ्रष्टाचार की तस्वीर सामने आयी है. जगन्नाथ चट्टोपाध्याय के मुताबिक, पड़ोसी राज्य के मुख्य सचिव ने पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर चिंता जताई थी कि राज्य में डिग्रियों की कथित तौर पर बिक्री हो रही है. इसके कारण दूसरे राज्यों के छात्र पश्चिम बंगाल में दाखिला लेने आ रहे हैं. इसी के बाद राज्य के निजी बीएड कॉलेजों की स्थिति की जांच का फैसला लिया गया.

कॉलेजों के इंफ्रास्ट्रक्चर की हुई समीक्षा

सरकार की ओर से राज्य के 602 निजी बीएड कॉलेजों के इंफ्रास्ट्रक्चर और शैक्षणिक व्यवस्था की समीक्षा की गयी. उन्होंने बताया कि 602 बीएड कॉलेजों का 100 अंकों के पैमाने पर मूल्यांकन किया गया. इसमें कॉलेजों के बुनियादी ढांचे, पढ़ाई और शैक्षणिक गुणवत्ता समेत विभिन्न मानकों को शामिल किया गया. कुल मिलाकर इन संस्थानों का औसत स्कोर करीब 51.5 प्रतिशत बताया गया. जांच में 53 बीएड कॉलेज ऐसे मिले, जिनका कोई स्पष्ट पता या अस्तित्व नहीं मिल पाया. वहीं, 17 संस्थानों पर एनसीटीई के निर्धारित मानकों और शर्तों का उल्लंघन करने की बात सामने आयी है. इन आंकड़ों ने राज्य की बीएड शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किये हैं.

114 कॉलेजों को मिले सिर्फ 30 अंक

जांच के दौरान 114 बीएड संस्थानों को महज 30 अंक मिले. वहीं, लगभग 121 कॉलेजों की बुनियादी ढांचागत स्थिति बेहद खराब पाई गई. इसके अलावा करीब 151 कॉलेज ऐसे रहे, जिन्हें 60 से 80 प्रतिशत के बीच अंक मिले. जगन्नाथ चट्टोपाध्याय ने दावा किया कि पश्चिम बंगाल में हर साल लगभग 62 हजार छात्र बीएड की डिग्री हासिल करते हैं. ऐसे में यदि संस्थानों की गुणवत्ता और प्रशिक्षण व्यवस्था में खामियां हैं, तो इसका सीधा असर राज्य की शिक्षा व्यवस्था और भविष्य में शिक्षक भर्ती की गुणवत्ता पर पड़ सकता है.

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दूसरे राज्यों के छात्रों के दाखिले पर भी सवाल

उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि गोवा और पूर्वोत्तर राज्यों सहित दूसरे क्षेत्रों से छात्र पश्चिम बंगाल के बीएड कॉलेजों में पढ़ने आ रहे हैं, जबकि कई जगहों पर बंगाली भाषा के अलावा अन्य भाषाओं में पढ़ाई की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने का आरोप लगाया गया है. मंत्री ने साफ संकेत दिया कि जिन बीएड कॉलेजों में जरूरी बुनियादी ढांचा नहीं है या जो निर्धारित मानकों को पूरा नहीं करते, उनके खिलाफ भविष्य में कड़े कदम उठाये जा सकते हैं. उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा के क्षेत्र में बड़े स्तर पर सुधार की दिशा में सरकार आगे बढ़ रही है.

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By आशीष झा

डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव. लगातार कुछ अलग और बेहतर करने के साथ हर दिन कुछ न कुछ सीखने की कोशिश. वर्तमान में बंगाल में कार्यरत. बंगाल की सामाजिक-राजनीतिक नब्ज को टटोलने के लिए प्रयासरत. देश-विदेश की घटनाओं और किस्से-कहानियों में विशेष रुचि. डिजिटल मीडिया के नए ट्रेंड्स, टूल्स और नैरेटिव स्टाइल्स को सीखने की चाहत.

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