बंगाल के 4 हजार से अधिक स्कूलों में क्यों नहीं हुआ एक भी एडमिशन, सामने आई चौंकाने वाली वजह

पश्चिम बंगाल सरकार ने शून्य नामांकन वाले 4,133 स्कूलों का निरीक्षण करने का आदेश दिया है. जानिए शिक्षा मंत्री दीपक बर्मन ने क्या कहा और क्यों दिख रही है विसंगति.

कोलकाता से अमर शक्ति प्रसाद की रिपोर्ट

पश्चिम बंगाल सरकार ने जिलों के प्रशासन को शून्य नामांकन वाले 4,133 स्कूलों का निरीक्षण करने और यह आकलन करने का निर्देश दिया है कि क्या उनकी अवसंरचना का इस्तेमाल किसी अन्य सार्वजनिक कार्य के लिए किया जा सकता है. राज्य के स्कूल शिक्षा मंत्री दीपक बर्मन ने शुक्रवार को यह जानकारी दी और कहा कि जहां तक व्यावहारिक होगा, इन संस्थानों को फिर से शुरू करने की संभावना को खुला रखा जायेगा. आंकड़ों के अनुसार, पश्चिम बंगाल में 6,769 ऐसे स्कूल हैं जहां केवल एक शिक्षक है और इनमें 2,29,569 छात्र पढ़ते हैं.

आंकड़ों में विसंगति की होगी जांच

शिक्षा विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि यह कदम हाल ही में जारी ‘यूनिफाइड डिस्ट्रिक्ट इंफॉर्मेशन सिस्टम फॉर एजुकेशन प्लस’ (यूडीआइएसई ) के आंकड़ों के बाद उठाया गया है. इन आंकड़ों के अनुसार, देश में शून्य नामांकन वाले 5,663 स्कूलों में से 4,133 पश्चिम बंगाल में हैं. अधिकारी ने कहा, ‘इन स्कूलों के लिए 19,502 शिक्षकों के नाम दर्ज हैं.’ बर्मन ने कहा कि ‘यूडीआइएसई’ के आंकड़े कुछ निजी स्कूलों द्वारा अपलोड किये गये डेटा में विसंगतियों को दर्शाते प्रतीत होते हैं.

कई स्कूलों में नहीं हुए डेटा अपडेट

उन्होंने कहा, ‘कई स्कूलों ने डेटा सही तरीके से अपलोड नहीं किया. कुछ ने शिक्षकों की जानकारी तो अद्यतन की, पर छात्रों का विवरण नहीं दिया. इसलिए ऐसे स्कूलों में छात्रों की संख्या शून्य दिख रही है, जबकि वहां शिक्षक मौजूद हैं.’ उन्होंने कहा कि ये विसंगतियां प्राथमिक, उच्च प्राथमिक और माध्यमिक समेत विभिन्न श्रेणियों के स्कूलों से जुड़ी हैं. हालांकि, राज्य सरकार द्वारा संचालित और सहायता प्राप्त संस्थान इस श्रेणी में शामिल नहीं हैं.

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सरकार ने दिये भौतिक सत्यापन का निर्देश

मंत्री ने कहा कि स्कूल शिक्षा विभाग ने हाल ही में सभी जिलों को निर्देश दिया है कि वे शून्य नामांकन वाले स्कूलों के भौतिक सत्यापन के लिए जिलाधिकारी की अध्यक्षता में एक समिति गठित करें और उनकी भूमि, इमारतों तथा अन्य बुनियादी ढांचे की सूची तैयार करें. उन्होंने कहा, ‘समितियों को इन परिसंपत्तियों की भौतिक स्थिति, बुनियादी सुविधाओं की उपलब्धता और स्थानीय जरूरतों के आधार पर अन्य सार्वजनिक कार्यों के लिए उनकी उपयुक्तता का आकलन करने को भी कहा गया है. रिपोर्ट दिसंबर 2027 तक जमा करनी होगी.’

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By आशीष झा

डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव. लगातार कुछ अलग और बेहतर करने के साथ हर दिन कुछ न कुछ सीखने की कोशिश. वर्तमान में बंगाल में कार्यरत. बंगाल की सामाजिक-राजनीतिक नब्ज को टटोलने के लिए प्रयासरत. देश-विदेश की घटनाओं और किस्से-कहानियों में विशेष रुचि. डिजिटल मीडिया के नए ट्रेंड्स, टूल्स और नैरेटिव स्टाइल्स को सीखने की चाहत.

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