WB Election Post Poll Violence PIL: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजे 4 मई को आयेंगे. इससे पहले राज्य में हिंसा की आशंकाओं और इसे रोकने के लिए कानूनी लड़ाई तेज हो गयी है. चुनाव के बाद होने वाली संभावित हिंसा (Post Poll Violence) को टालने के लिए कलकत्ता हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दायर की गयी है. इस मामले की सुनवाई 4 मई को होगी. याचिका में मांग की गयी है कि संवेदनशील इलाकों में बूथवाइज परिणाम जारी न किये जायें, ताकि मतदाताओं की पहचान उजागर न हो और वे हिंसा का शिकार होने से बच सकें.
हाईकोर्ट में सुनवाई टली, 4 मई पर टिकीं निगाहें
चीफ जस्टिस की अनुपस्थिति में पिछले दिनों जस्टिस अरिजित बनर्जी ने इस मामले की सुनवाई की. विषय की संवेदनशीलता को देखते हुए अदालत ने अगली सुनवाई के लिए 4 मई की तारीख तय की है. केस दायर करने वाले हरिशंकर चट्टोपाध्याय ने बताया है कि 4 मई को सुबह 10:30 बजे चीफ जस्टिस सुजय पॉल और जस्टिस पार्थसारथी सेन की खंडपीठ इस पर विचार करेगी. याचिकाकर्ता को उम्मीद है कि मतगणना के दिन ही कोर्ट कोई ऐतिहासिक फैसला सुना सकता है.
क्या है टोटलाइजर मशीन? कैसे करता है काम?
वरिष्ठ अधिवक्ता चित्तरंजन पांडा (84) की ओर से दायर इस याचिका में मुख्य रूप से ‘टोटलाइजर मशीन’ के इस्तेमाल पर जोर दिया गया है. कंडक्ट ऑफ इलेक्शन रूल्स 1961 के नियम 59A के तहत आयोग के पास टोटलाइजर मशीन के जरिये 30-40 बूथों के परिणामों को मिलाकर जारी करने का प्रावधान है.
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WB Election Post Poll Violence PIL: क्या होगा फायदा
यदि परिणाम मिक्स करके जारी किये जाते हैं, तो किसी खास मोहल्ले या बूथ के लोगों का चुनावी रुझान पता नहीं चल पायेगा. इससे राजनीतिक प्रतिशोध की गुंजाइश खत्म हो जायेगी.
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बूथ वाइज रिजल्ट क्यों है खतरनाक?
अधिवक्ता चट्टोपाध्याय ने बताया कि वर्तमान में काउंटिंग सेंटर में फॉर्म 17C के जरिये ‘बूथ वाइज’ डेटा राजनीतिक एजेंटों को मिल जाता है. इससे पार्टियां आसानी से चिह्नित कर लेती हैं कि किस इलाके ने उन्हें वोट दिया और किसने नहीं. संवेदनशील इलाकों में यह डेटा हिंसा भड़काने का सबसे बड़ा कारण बनता है. पिछले चुनावों का कड़वा अनुभव भी यही बताता है कि बूथ स्तर के आंकड़े सामने आने के बाद ही रंजिशें शुरू होती हैं.
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सुप्रीम कोर्ट में चुनाव आयोग का हलफनामा
याचिका में सुप्रीम कोर्ट में चल रहे एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) के एक मामले का भी जिक्र किया गया है. इसमें चुनाव आयोग ने खुद हलफनामा देकर स्वीकार किया है कि आयोग हर बूथ का अलग-अलग परिणाम जारी करने के लिए कानूनी रूप से बाध्य नहीं है. ऐसे में जनहित में संवेदनशील क्षेत्रों में परिणाम के प्रकाशन के तरीके में बदलाव की मांग की गई है.
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