राज्यपाल की आपत्ति से रायगंज व उत्तर बंगाल विवि में वीसी की नियुक्ति अटकी

यह विवाद सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है, जहां इस विषय पर सुनवाई जारी है.

कोलकाता. राज्य में लंबे समय से खाली पड़े विश्वविद्यालयों के कुलपति पदों को भरने की प्रक्रिया एक बार फिर विवादों में घिर गयी है. राज्यपाल व विश्वविद्यालयों के चांसलर सीवी आनंद बोस ने रायगंज यूनिवर्सिटी और नॉर्थ बंगाल यूनिवर्सिटी के लिए प्रस्तावित वाइस चांसलरों (कुलपतियों) के नामों पर आपत्ति जतायी है, जिसके चलते इन दोनों नियुक्तियों पर सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल रोक लगा दी है.

सुप्रीम कोर्ट में जारी है सरकार-राज्यपाल विवाद: राज्यपाल और पश्चिम बंगाल की राज्य सरकार के बीच विश्वविद्यालयों की प्रशासनिक नियुक्तियों को लेकर पहले से ही तनाव चल रहा है. यह विवाद सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है, जहां इस विषय पर सुनवाई जारी है. 15 अक्तूबर को अदालत दोबारा मामले की सुनवाई करेगी, जिसमें विवादित दो नामों पर निर्णय होने की संभावना है.

पिछले दो वर्षों से कार्यवाहक कुलपतियों के भरोसे विश्वविद्यालय

गौरतलब है कि इन विश्वविद्यालयों में पिछले दो वर्षों से कोई स्थायी कुलपति नहीं था और कार्यवाहक कुलपतियों के भरोसे विश्वविद्यालयों का संचालन हो रहा था. सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद राज्य सरकार ने स्थायी नियुक्तियों की प्रक्रिया शुरू की थी.

आठ विवि में नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू, दो नामों पर विवाद

राज्य सरकार ने हाल ही में राज्य के आठ विश्वविद्यालयों में स्थायी कुलपति नियुक्त करने का निर्णय लिया था. इनमें से छह नामों को मंजूरी मिल गयी है, जबकि दो नाम – अर्नब सेन (रायगंज यूनिवर्सिटी) और ओम प्रकाश मिश्रा (नॉर्थ बंगाल यूनिवर्सिटी) पर राज्यपाल की आपत्ति के चलते नियुक्ति टल गयी है. सूत्रों के अनुसार, राज्यपाल को ओम प्रकाश मिश्रा के नाम पर इसलिए आपत्ति है क्योंकि वह पहले उत्तर बंगाल विश्वविद्यालय में कार्यवाहक कुलपति रह चुके हैं और उस कार्यकाल के दौरान भूमि हस्तांतरण में भ्रष्टाचार और शिक्षकों-कर्मचारियों की वेतन वृद्धि में अनियमितताओं के आरोप लगे थे. राज्यपाल ने उस समय मामले की जांच के आदेश दिये थे, लेकिन जांच की वर्तमान स्थिति स्पष्ट नहीं है.

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Author: GANESH MAHTO

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