कोलकाता
. विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक हलचल तेज हो गयी है. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शनिवार को कोलकाता में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो व सीएम ममता बनर्जी पर तीखे आरोप लगाये. उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी हमेशा विक्टिम कार्ड की राजनीति करती हैं. श्री शाह ने तंज कसते हुए कहा कि कभी उनका पैर टूट जाता है, कभी वह सिर पर पट्टी बांध लेती हैं. कभी बीमार हो जाती हैं और कभी चुनाव आयोग के सामने बेचारा बनकर गालियां देती हैं. उन्होंने दावा किया कि चुनाव के समय ऐसी घटनाएं सामने आती हैं, जिनसे सहानुभूति लेने की कोशिश की जाती है. लेकिन अब जनता इस राजनीति को समझ चुकी है और इसका चुनाव में जवाब देगी. शाह ने आइएएस-आइपीएस अधिकारियों के तबादलों का किया बचाव : अमित शाह ने निर्वाचन आयोग द्वारा राज्य में आइएएस व आइपीएस अधिकारियों के बड़े पैमाने पर तबादलों का बचाव करते हुए शनिवार को आरोप लगाया कि राज्य में कई अधिकारी सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के ‘कैडर’ के रूप में काम करते थे और स्वतंत्र रूप से काम करने में असमर्थ थे. तृणमूल सरकार के खिलाफ भाजपा का आरोपपत्र जारी करने के बाद संवाददाता सम्मेलन में अमित शाह ने दावा किया कि अधिकारियों के तबादलों के कारण इस वर्ष राम नवमी समारोह के दौरान हिंसा की घटनाएं कम हुईं.श्री शाह ने कहा कि देश भर में, निर्वाचन आयोग चुनावों से पहले अधिकारियों का तबादला करता है. यह कोई नयी बात नहीं है. लेकिन पश्चिम बंगाल में ज्यादातर अधिकारी सरकार के लिए काम करते हैं, इसीलिए यहां ज्यादा तबादले हुए हैं. गौरतलब है कि श्री शाह की यह टिप्पणी ऐसे वक्त आयी है, जब निर्वाचन आयोग द्वारा अधिकारियों के तबादलों को लेकर भाजपा और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बीच जुबानी जंग छिड़ी हुई है. उन्होंने कहा : हम किसी भी प्रकार की हिंसा का समर्थन नहीं करते. उनकी ये टिप्पणी शुक्रवार को रामनवमी समारोह के दौरान मुस्लिम बहुल मुर्शिदाबाद जिले में हुई हिंसा के संदर्भ में आयी है.
युवाओं के लिए की महत्वपूर्ण घाेषणा : शिक्षक नियुक्ति और अन्य घोटालों का जिक्र करते हुए अमित शाह ने बंगाल के युवाओं के लिए बड़ा एलान किया. उन्होंने कहा कि नियुक्ति घोटालों के कारण जिन युवाओं की उम्र सीमा निकल चुकी है, उन्हें भाजपा सरकार पांच साल का रिलैक्सेशन देगी. प्रभावित युवाओं को एसएससी नियुक्तियों में दोबारा मौका दिया जायेगा और पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया जायेगा. सिर्फ बंगाल में एसआइआर के लिए न्यायिक अधिकारियों की करनी पड़ी नियुक्ति : अमित शाह ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआइआर) को लेकर ममता बनर्जी की आलोचना पर भी पलटवार किया और दावा किया कि बंगाल एकमात्र ऐसा राज्य है, जहां यह प्रक्रिया विवादों में घिरी. उन्होंने सवाल उठाया कि एसआइआर प्रक्रिया के लिए अदालत को केवल पश्चिम बंगाल में ही न्यायिक अधिकारियों की नियुक्ति क्यों करनी पड़ी? वाममोर्चा शासित केरल या द्रमुक शासित तमिलनाडु में कोई समस्या क्यों नहीं हुई? उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य के जिलाधिकारी डर के साये में काम कर रहे थे. उन्होंने कहा कि कई वर्षों के बाद, अंग, बंग और कलिंग, यानी बिहार, पश्चिम बंगाल और ओडिशा में एक ही पार्टी की सरकारें होंगी. .केंद्रीय गृह मंत्री ने राज्य की ओबीसी नीति पर उठाये सवाल : केंद्रीय गृह व सहकारिता मंत्री ने कहा कि हम बंगाल की जनता को बताना चाहते हैं कि पिछले बजट में अल्पसंख्यकों के लिए ममता बनर्जी की सरकार द्वारा 5,713 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया. मैं इसका विरोध नहीं कर रहा हूं, लेकिन इसके अनुपात में पिछड़ा वर्ग की संख्या तीन गुना होने के बावजूद तृणमूल सरकार द्वारा ओबीसी के लिए मात्र 2,533 करोड़ रुपये का बजट रखा गया. कम संख्या होने पर भी अल्पसंख्यकों को अधिक बजट और अधिक संख्या होने पर भी पिछड़े वर्ग को कम बजट दिया जाना एक महत्वपूर्ण तथ्य है, जिसे जनता को जानना चाहिए. ममता बनर्जी सरकार ने 77 समुदायों को ओबीसी में शामिल किया, जिनमें से 75 समुदाय मुस्लिम थे. क्या अन्य कोई ओबीसी वर्ग नहीं है? धर्म के आधार पर ओबीसी का निर्धारण लंबे समय तक नहीं चल सकता.
उन्होंने कहा कि तुष्टीकरण की राजनीति के चलते बंगाल गंभीर समस्याओं से घिर चुका है.