विष्णुपुर के टेराकोटा मंदिरों को यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज टैग की राज्यसभा में उठी मांग, 27 साल से लटकी है फाइल

Bishnupur Terracotta Temple UNESCO: बांकुड़ा के ऐतिहासिक 17वीं सदी के विष्णुपुर टेराकोटा मंदिरों को यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में शामिल कराने की मांग राज्यसभा में उठी. राहुल सिन्हा ने 27 साल से लंबित फाइल पर की कार्रवाई की केंद्र सरकार से मांग की.

Bishnupur Terracotta Temple UNESCO: पश्चिम बंगाल के बांकुड़ा (Bankura) जिले के विश्व प्रसिद्ध ऐतिहासिक विष्णुपुर टेराकोटा मंदिरों (Bishnupur Terracotta Temples) को यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल (UNESCO World Heritage Site) सूची में शामिल कराने की मांग गरमा गयी है. सोमवार को राज्यसभा में शून्यकाल (Zero Hour) में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सांसद राहुल सिन्हा ने इस मुद्दे को उठाते हुए केंद्र सरकार से विशेष पहल करने का आग्रह किया. राहुल सिन्हा ने कहा कि 17वीं सदी की यह अद्भुत स्थापत्य कला भारतीय पौराणिक परंपराओं और संस्कृति की अनूठी धरोहर है. इसे अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने के लिए प्रयास तेज करना बेहद जरूरी है.

27 सालों से लटकी है फाइल

संसद में मुद्दा उठाते हुए बीजेपी सांसद ने कहा कि विष्णुपुर के राधा-कृष्ण और अन्य टेराकोटा मंदिरों को यूनेस्को की सूची में शामिल कराने की प्रक्रिया शुरू हुए करीब 27 साल बीत चुके हैं. वर्ष 1998 में इसे यूनेस्को की अस्थायी (Tentative) सूची में शामिल किया गया था, लेकिन इसके बाद अपेक्षित प्रगति नहीं हो सकी. उन्होंने केंद्र सरकार से संस्कृति मंत्रालय के जरिये इस प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ाने की अपील की.

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रामायण-महाभारत की गाथा बयां करती हैं लाल मिट्टी की दीवारें

लाल मिट्टी से बनी विष्णुपुर के मंदिरों की दीवारें रामायण और महाभारत काल की गाथा बयां करती हैं. आइए, इन ऐतिहासिक मंदिरों की खासियत और उनके इतिहास पर नजर डालते हैं.

  • मल्ल वंश की विरासत : 17वीं शताब्दी में मल्ल राजवंश (Malla Dynasty) के प्रतापी राजाओं, विशेषकर राजा रघुनाथ सिंह, बीर हम्बीर और बीर सिंह ने इन भव्य मंदिरों का निर्माण कराया था.
  • अद्भुत वास्तुकला : पत्थर की कमी के कारण मिट्टी की पकी हुई ईंटों (टेराकोटा) से बने इन मंदिरों की दीवारों पर रामायण, महाभारत और पौराणिक कथाओं के दृश्यों की जटिल और सूक्ष्म नक्काशी की गयी है.
  • रास मंच और जोर-बंगला : विष्णुपुर का ‘रास मंच’, ‘जोर-बंगला’ और ‘मदन मोहन मंदिर’ अपनी स्थापत्य शैली के लिए पूरी दुनिया में अद्वितीय हैं.

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यूनेस्को टैग मिलने से क्या होगा फायदा?

राहुल सिन्हा ने कहा कि विष्णुपुर को यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट का दर्जा मिलने से न केवल बंगाल की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक मंच मिलेगा, बल्कि इससे उत्तर व दक्षिण बंगाल के पर्यटन (Tourism) उद्योग को भारी बढ़ावा मिलेगा. इसके साथ ही स्थानीय कारीगरों व अर्थव्यवस्था को नयी संजीवनी मिलेगी.


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By मिथिलेश झा

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