कोलकाता.
विधानसभा चुनाव से पहले चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल में अवैध राजनीतिक विज्ञापनों के खिलाफ व्यापक अभियान चलाते हुए सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है. आयोग की ओर से बताया गया है कि राज्यभर में अब तक कुल तीन लाख 58 हजार 986 अनधिकृत राजनीतिक पोस्टर, बैनर और होर्डिंग हटाये जा चुके हैं, जो चुनाव आचार संहिता के उल्लंघन के दायरे में आते थे. आयोग के अनुसार इनमें से अधिकांश मामले सार्वजनिक संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने से जुड़े हैं.कुल तीन लाख 11 हजार 829 विज्ञापन सरकारी दीवारों, सड़कों और अन्य सार्वजनिक स्थलों से हटाये गये, जबकि 19 हजार 901 मामले निजी संपत्तियों पर बिना अनुमति लगाये गये राजनीतिक प्रचार से संबंधित थे. आयोग ने स्पष्ट किया है कि निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए इस तरह की कार्रवाई लगातार जारी रहेगी.उत्तर बंगाल के कूचबिहार जिले में सबसे अधिक 33 हजार 491 अवैध विज्ञापन हटाये जाने की खबर है. इनमें 29 हजार 474 सार्वजनिक संपत्तियों और चार हजार 17 निजी संपत्तियों से जुड़े थे. इसके बाद उत्तर 24 परगना जिले का स्थान रहा, जहां कुल 31 हजार 920 विज्ञापन हटाये गये. इनमें से 31 हजार 789 सार्वजनिक और 105 निजी संपत्तियों से संबंधित थे.
दूसरी ओर कालिम्पोंग जिले में सबसे कम 593 विज्ञापन हटाये गये और ये सभी सार्वजनिक संपत्तियों से जुड़े थे. उल्लेखनीय है कि राज्य में विधानसभा चुनाव दो चरणों में कराये जायेंगे. पहले चरण का मतदान 23 अप्रैल को 152 सीटों पर होगा, जबकि दूसरे चरण में 29 अप्रैल को शेष 142 सीटों पर वोट डाले जायेंगे. चुनाव को शांतिपूर्ण और निष्पक्ष तरीके से संपन्न कराने के लिए चुनाव आयोग सुरक्षा तैयारियों की लगातार समीक्षा कर रहा है.आदर्श आचार संहिता के बीच राज्यभर में 181 करोड़ से अधिक की नकदी, शराब व मादक पदार्थ की जब्ती
राज्य की सभी 294 विधानसभा सीटों पर आदर्श आचार संहिता (एमसीसी) का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जा रहा है. इसके तहत अब तक 181 करोड़ रुपये से अधिक की नकदी, शराब, मादक पदार्थ और अन्य सामग्री जब्त की जा चुकी है. अधिकारियों ने सोमवार को यह जानकारी दी. अधिकारियों के अनुसार, अवैध राजनीतिक विज्ञापनों को हटाने के लिए भी व्यापक अभियान चलाया जा रहा है. इस दौरान सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की 3,11,829 और निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की 19,901 घटनाएं सामने आयी हैं. इन मामलों में विभिन्न जिलों में कुल 3,58,986 केस दर्ज किये गये हैं. उन्होंने बताया कि शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई और नकदी व अन्य सामग्रियों के अवैध परिवहन की जांच के लिए 1,800 से अधिक उड़न दस्ते (एफएसटी) और 2,200 से अधिक एसएसटी तैनात की गयी हैं.