TMC में गृहयुद्ध! नेताओं ने I-PAC को ठहराया जिम्मेदार, ममता बनर्जी को संकट की चेतावनी, क्या खतरे में है दीदी की कुर्सी?

TMC Internal Fight: बंगाल चुनाव में करारी हार के बाद TMC में फूट! नेताओं ने I-PAC की रणनीतियों को बताया हार की वजह और ममता बनर्जी को कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी. जानें क्यों आई-पैक की जांच बन सकती है दीदी के लिए गले की फांस.

TMC Internal Fight: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) की नींव हिला दी है. राज्य में सत्ता गंवाने के बाद अब पार्टी के भीतर ‘आरोप-प्रत्यारोप’ का दौर शुरू हो गया है. कई दिग्गज नेताओं ने हार का ठीकरा चुनावी रणनीति बनाने वाली संस्था I-PAC पर फोड़ दिया है.

कानूनी संकट में फंस सकती हैं ममता बनर्जी

इतना ही नहीं, वरिष्ठ नेताओं के एक गुट ने ममता बनर्जी को आगाह किया है कि I-PAC के कामकाज के तरीकों और वित्तीय लेन-देन के कारण वे कानूनी संकट में फंस सकती हैं. हार के बाद मचे इस घमासान ने टीएमसी के भविष्य पर सवालिया निशान लगा दिये हैं.

I-PAC पर फूटा नेताओं का गुस्सा

पार्टी की समीक्षा बैठक में कई विधायकों और पूर्व मंत्रियों ने चुनावी रणनीति बनाने वाली संस्था पर गंभीर आरोप लगाये हैं. उनका दावा है कि I-PAC के युवाओं ने ममता बनर्जी को जमीनी हकीकत से दूर रखा और केवल ‘सब ठीक है’ वाली रिपोर्ट्स पेश की.

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उम्मीदवारों के चयन में हुई स्थानीय भावनाओं की अनदेखी

आरोप है कि टिकट बंटवारे में स्थानीय भावनाओं की अनदेखी की गयी और I-PAC के सर्वे के आधार पर ऐसे लोगों को उतारा गया, जिनका जनता से कोई जुड़ाव नहीं था. वरिष्ठ नेताओं ने शिकायत की है कि चुनावी कैंपेन के दौरान पार्टी के पुराने वफादारों को हाशिये पर धकेलकर ‘मैनेजमेंट गुरुओं’ को तरजीह दी गयी. इससे कार्यकर्ता हताश हो गये.

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ममता को ‘लीगल रिस्क’ की चेतावनी

इस रिपोर्ट का सबसे चौंकाने वाला पहलू ममता बनर्जी को दी गयी कानूनी चेतावनी है. I-PAC के निदेशकों पर चल रही ईडी (ED) की जांच और मनी लाउंडरिंग के आरोपों का हवाला देते हुए नेताओं ने कहा है कि संस्था के साथ पार्टी के करीबी वित्तीय रिश्ते ‘दीदी’ के लिए मुसीबत बन सकते हैं.

सबूतों के साथ छेड़छाड़ और सिंडिकेट राज का आरोप

हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने ममता बनर्जी को आई-पैक जांच में हस्तक्षेप के लिए फटकार लगायी थी. इसका जिक्र करते हुए नेताओं ने डर जताया है कि इससे उनकी छवि और कानूनी स्थिति दोनों कमजोर हुई है. कुछ नेताओं का यह भी मानना है कि चुनाव के दौरान फंड्स का जिस तरह से प्रबंधन किया गया, वह भविष्य में गंभीर कानूनी जांच का केंद्र बन सकता है.

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पार्टी के भीतर पुराने बनाम नये की जंग

हार के बाद टीएमसी 2 गुटों में बंटती नजर आ रही है. एक गुट अभिषेक बनर्जी के करीबियों और I-PAC का समर्थक है, जबकि दूसरा गुट ममता बनर्जी के पुराने साथियों का है. पुराने नेताओं का कहना है कि अगर पार्टी को बचाना है, तो उसे कॉरपोरेट कल्चर से बाहर निकालकर दोबारा मा-माटी-मानुष की जड़ों की ओर ले जाना होगा.

TMC Internal Fight: अभिषेक बनर्जी की चुप्पी पर सवाल

I-PAC के सबसे बड़े पैरोकार रहे अभिषेक बनर्जी फिलहाल इन आरोपों पर चुप्पी साधे हुए हैं. लेकिन पार्टी सूत्रों का कहना है कि अगर संगठन के भीतर विद्रोह शांत नहीं हुआ, तो आने वाले दिनों में कई बड़े नेता पाला बदल सकते हैं या पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के खिलाफ मोर्चा खोल सकते हैं.

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ममता बनर्जी की दोहरी चुनौती

बंगाल की राजनीति अब ऐसे मोड़ पर है, जहां ममता बनर्जी को न केवल विपक्ष (भाजपा) से लड़ना है, बल्कि अपनी ही पार्टी के भीतर उठते बगावती सुरों और कानूनी तलवारों से भी खुद को बचाना है.

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Published by: Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 30 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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