TMC Candidates West Bengal Election 2026: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के लिए सियासी पारा चरम पर है. 23 और 29 अप्रैल को होने वाले मतदान से पहले तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ममता बनर्जी ने बड़ा दांव चला है. उन्होंने खेल, शिक्षा और अल्पसंख्यक जगत के 3 बड़े नामों को पार्टी का न केवल झंडा थमाया, बल्कि तीनों को विधानसभा चुनाव 2026 का टिकट भी दे दिया है. माना जा रहा है कि दीदी के इस गेमप्लान से उत्तर बंगाल, जंगलमहल और अल्पसंख्यक बहुल क्षेत्रों में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), कांग्रेस और वामदलों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं.
शिव शंकर पॉल : उत्तर बंगाल की ‘पिच’ पर दीदी के स्ट्राइक बॉलर
फर्स्ट क्लास क्रिकेट के तेज गेंदबाज रहे शिव शंकर पॉल का कूचबिहार और तूफानगंज जैसे इलाकों में जबरदस्त प्रभाव है. अपनी क्रिकेट अकादमी के जरिये वह हजारों युवाओं से जुड़े हैं. भाजपा का गढ़ माने जाने वाले उत्तर बंगाल में शिव शंकर पॉल को उम्मीदवार बनाकर ममता बनर्जी ने युवाओं को साधने की कोशिश की है. ‘खेलाश्री’ योजना के ब्रांड एंबेसडर के तौर पर पॉल अब सियासत की पिच पर भाजपा के खिलाफ दीदी के लिए बॉलिंग करेंगे. दीदी को उम्मीद है कि उत्तर बंगाल के वोटर को वह टीएमसी के पक्ष में ‘स्विंग’ कराने में सफल होंगे.
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तनुश्री हांसदा : जंगलमहल में भाजपा के ‘आदिवासी कार्ड’ की काट
शिक्षाविद तनुश्री हांसदा का टीएमसी में शामिल होना और उम्मीदवार बनना बांकुड़ा, झारग्राम और पुरुलिया के समीकरणों को बदल सकता है. संताली लेखक संघ की प्रमुख आवाज और प्रोफेसर तनुश्री की बौद्धिक और आदिवासी समाज पर गहरी पकड़ है. भाजपा के आदिवासी वोट बैंक में सेंध लगाने के लिए तनुश्री हांसदा को ममता बनर्जी ने अपना सबसे बड़ा हथियार बनाया है.
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मुफ्ती अब्दुल मतीन : 86 मदरसों का साथ और वोट बैंक की घेराबंदी
मुर्शिदाबाद, हावड़ा और उत्तर एवं दक्षिण 24 परगना के 86 मदरसों पर प्रभाव रखने वाले मुफ्ती अब्दुल मतीन उर्फ मतीन साहब का टीएमसी में आना अल्पसंख्यकों के बीच पार्टी की स्थिति को और मजबूत करने की कोशिश है. कांग्रेस और माकपा के अलग-अलग लड़ने से होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए मतीन साहब को चुनावी मैदान में उतारना टीएमसी का रणनीतिक फैसला है. इसका उद्देश्य अल्पसंख्यक मतों का बिखराव रोकना है.
बंगाल चुनाव 2026 : एक नजर में
- मतदान की तारीखें : 23 अप्रैल और 29 अप्रैल 2026
- कुल विधानसभा सीटें : 294
- नतीजे : 4 मई 2026 को आयेंगे
- रणनीति : युवा, आदिवासी और अल्पसंख्यक वोटर को साधना
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