खास बातें
WB Minister Sujit Bose ED Interrogation: बंगाल विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण की वोटिंग खत्म होने के बाद ममता बनर्जी सरकार के मंत्रियों की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं. अग्निशमन सेवा मंत्री सुजीत बोस शुक्रवार सुबह सॉल्टलेक स्थित सीजीओ कॉम्प्लेक्स (ED के कार्यालय) में पूछताछ के लिए पेश हुए.
हाईकोर्ट के आदेश पर हाजिर हुए सुजीत बोस
कलकत्ता हाईकोर्ट के सख्त निर्देश के बाद बोस को केंद्रीय जांच एजेंसी के सामने हाजिर होना पड़ा है. मामला नगर निकाय भर्ती घोटाले (Municipality Recruitment Scam) से जुड़ा है, जिसमें ईडी ने दावा किया था कि तलाशी के दौरान कई महत्वपूर्ण दस्तावेज उसके हाथ लगे हैं.
बेटे समुद्र और वकीलों के साथ पहुंचे मंत्री
सुजीत बोस शुक्रवार सुबह ठीक 10:30 बजे से कुछ मिनट पहले ईडी दफ्तर पहुंचे. उनके साथ उनके बेटे समुद्र बोस और दो वकीलों की टीम भी थी. इससे पहले सुजीत बोस ने ईडी के 3 समन को नजरअंदाज किया था. उन्होंने चुनाव प्रचार का हवाला देकर पेशी से छूट मांगी थी और हाईकोर्ट में याचिका भी दायर की थी. हालांकि, अदालत ने राहत देने के बजाय उन्हें शुक्रवार को जांच में सहयोग करने का आदेश दिया.
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दक्षिण दमदम नगर पालिका में अनियमितता मामले में हुई थी छापेमारी
दक्षिण दमदम नगर पालिका में हुई अनियमितताओं के मामले में ईडी ने मंत्री और उनके बेटे के ठिकानों पर दो बार छापेमारी की थी. जांचकर्ताओं का दावा है कि उनके पास ऐसे दस्तावेज हैं, जो भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ी की पुष्टि करते हैं.
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WB Minister Sujit Bose ED Interrogation: बीजेपी के राजनीतिक बदले का शिकार हूं : सुजीत बोस
ईडी दफ्तर में दाखिल होने से पहले सुजीत बोस ने केंद्र सरकार और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर तीखा हमला बोला. उन्होंने कहा कि वे निर्दोष हैं. वह प्रतिशोध की राजनीति का शिकार हुए हैं. उन्हें सिर्फ इसलिए निशाना बनाया जा रहा है, क्योंकि वे भाजपा की नीतियों का विरोध करते हैं. बिधाननगर सीट से चुनाव लड़ रहे बोस ने कहा कि मतदान खत्म होते ही उन्हें परेशान करने के लिए एजेंसी को सक्रिय कर दिया गया है.
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क्या है नगर निकाय भर्ती घोटाला?
यह पूरा मामला राज्य की विभिन्न नगर पालिकाओं में ग्रुप-सी और ग्रुप-डी पदों पर हुई अवैध नियुक्तियों से जुड़ा है. आरोप है कि अयोग्य उम्मीदवारों से पैसे लेकर उन्हें नौकरी दी गयी. इस मामले में जांच की आंच अब सीधे राज्य कैबिनेट तक पहुंच गयी है. जांच एजेंसी यह जानने की कोशिश कर रही है कि इन नियुक्तियों में सुजीत बोस की क्या भूमिका थी और क्या उनके परिवार के स्वामित्व वाले प्रतिष्ठानों का इस्तेमाल पैसों के लेन-देन में किया गया.
