बारुईपुर मुठभेड़ पर बोलीं कामदुनी आंदोलन की नेता मौसुमी कयाल- यह असुरों के संहार की शुरुआत

पश्चिम बंगाल के बारुईपुर में 11 वर्षीय बच्ची से दुष्कर्म और हत्या के मुख्य आरोपी प्रभाष मंडल के पुलिस मुठभेड़ में मारे जाने से महिलाओं में खुशी की लहर है. चर्चित एक्टिविस्ट मौसुमी कयाल ने इसे 'असुरों के संहार की शुरुआत' करार दिया है.

Baruipur Encounter: पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले के बारुईपुर में 11 वर्षीय बच्ची से दुष्कर्म और हत्या मामले के मुख्य आरोपी प्रभाष मंडल के पुलिस मुठभेड़ में मारे जाने पर महिलाओं ने खुशी का इजहार किया है. महिलाओं के खिलाफ यौन हिंसा के खिलाफ आवाज उठाने वाली चर्चित एक्टिविस्ट मौसुमी कयाल ने आरोपी की मौत पर संतोष व्यक्त करते हुए इसे ‘असुरों के संहार की शुरुआत’ करार दिया है.

मंगलवार देर रात मुठभेड़ में मारा गया प्रभाष मंडल

मंगलवार देर रात बारुईपुर में पुलिस के साथ हुई कथित मुठभेड़ में मुख्य आरोपी प्रभाष मंडल को मार गिराया गया. इस खबर पर प्रतिक्रिया देते हुए कयाल ने बुधवार को कहा कि आरोपी के मारे जाने से उन्हें बहुत सुकून मिला है. उन्होंने कहा कि राज्य में महिलाओं और मासूम बेटियों के खिलाफ बढ़ते जघन्य अपराधों पर पूरी तरह अंकुश लगाने के लिए ऐसे ही त्वरित और कड़े कदम समय की मांग हैं.

बलात्कारियों के लिए यही असली सजा : मौसुमी कयाल

मुठभेड़ की इस कार्रवाई को ‘प्रशंसनीय’ और पूरी तरह ‘जायज’ ठहराते हुए मौसुमी कयाल ने कहा कि ऐसे मामलों में ढिलाई की बजाय अपराधियों के खिलाफ तुरंत और कठोरतम कदम उठाए जाने चाहिए. कामदुनी आंदोलन की अगुवा ने कहा- जांच होनी चाहिए, आरोपियों के बयान दर्ज किये जाने चाहिए और उसके बाद उन्हें मुठभेड़ में मार गिराया जाना चाहिए. यही असली न्याय है. बलात्कारियों के लिए यही सबसे बड़ा सबक और सजा है, ताकि कोई भी अपराधी इस राज्य में किसी भी महिला के खिलाफ अपराध करने की सोच भी न सके.

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ममता बनर्जी की सरकार पर साधा निशाना

मौसुमी कयाल ने पूर्ववर्ती तृणमूल कांग्रेस सरकार के रवैये पर तीखा हमला बोला. उन्होंने आरोप लगाया कि ममता बनर्जी के शासनकाल में बलात्कार जैसे गंभीर और संवेदनशील मामलों को भी अक्सर ‘मनगढ़ंत’ या ‘सजायी गयी घटनाएं’ बताकर खारिज कर दिया जाता था.

कामदुनी से आरजी कर तक के आरोपियों को मिला संरक्षण

कयाल ने कहा कि वर्ष 2013 के कामदुनी कांड से लेकर आरजी कर मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल की दुखद घटना तक, कई बार आरोपियों को सरकारी वकीलों और सीआईडी के कुछ अधिकारियों द्वारा संरक्षण दिये जाने की बातें सामने आयी थीं. कयाल ने याद दिलाया कि जब वह 2013 में कॉलेज छात्रा से गैंगरेप और हत्या के बाद इंसाफ मांगने सड़कों पर उतरी थीं, तब तत्कालीन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने उन्हें ‘माओवादी’ तक कह दिया था. लेकिन सामाजिक दबाव के बावजूद वे (कयाल) डरी नहीं और लंबी कानूनी और सामाजिक लड़ाई लड़ी.

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‘बदल रही हैं परिस्थितियां, आम लोग और माताएं खुश’

मौसुमी कयाल ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सरकार और उसके प्रशासनिक रुख की खुलकर सराहना की. उन्होंने कहा कि राज्य में अब स्थितियां तेजी से बदल रही हैं. नये प्रशासन ने महिला सुरक्षा के प्रति जीरो टॉलरेंस का कड़ा संदेश दिया है. आम नागरिक और माताएं इस त्वरित कार्रवाई से खुश हैं, क्योंकि उन्होंने कभी इस तरह की सख्त और सीधी पुलिसिया कार्रवाई की कल्पना भी नहीं की थी. उन्होंने कहा कि इस मुठभेड़ से अपराधियों और असामाजिक तत्वों के मन में कानून का खौफ पैदा होगा.

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By Mithilesh Jha

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