संवाददाता, हुगली
हुगली जिले के रिसड़ा नगरपालिका क्षेत्र में, एक छोटे से घर में इन दिनों सन्नाटा पसरा हुआ है. इस घर के बेटे, बीएसएफ जवान पूर्णम कुमार साव, पिछले 15 दिनों से पाकिस्तान रेंजर्स के कब्जे में हैं. सीमा पर तनाव के बीच बीएसएफ ने भी एक पाकिस्तानी रेंजर को गिरफ्त में लिया है. ‘ऑपरेशन सिंदूर”” की सफलता के बाद पूर्णम की भी घर वापसी दुआ की जा रही है. भारतीय सेना ने पाकिस्तानी सीमा के भीतर घुसकर आतंकवादी शिविरों पर हमला बोला है. यह कार्रवाई पुलवामा जैसे हमलों की पुनरावृत्ति रोकने के उद्देश्य से की गयी, लेकिन इसका सीधा असर पड़ा रिसड़ा के इस परिवार पर, जो हर क्षण बेटे की सलामती की दुआ कर रहा था. इसके साथ ही रिसड़ा नगरपालिका के चेयरमैन विजय सागर मिश्रा का भी चिंता बढ़ गयी है. वह पूर्णम के रिहाई के लिए अपनी ओर से अधिक प्रयासरत हैं. पूर्णम की पत्नी रजनी साव, जो गर्भवती हैं, पति की सलामती को लेकर गहरे मानसिक तनाव में हैं. उनकी आंखों में हर समय आंसू रहते हैं. बिखरी आवाज में कहती हैं, अब कुछ भी साफ नहीं लग रहा. सब कुछ धुंधला हो गया है. रजनी हाल ही में बीएसएफ हेडक्वार्टर में जाकर खुद कमांडिंग ऑफिसर से बात कर चुकी हैं, लेकिन इतने दिन बीतने के बाद भी कोई अच्छी खबर नहीं मिली. अब उन्होंने तय किया है कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से मिलेंगी और अपनी असहायता और चिंता की पूरी कहानी उनके सामने रखेंगी. उधर कल रात तृणमूल कांग्रेस के विधायक विवेक गुप्ता रिसड़ा पहुंचे थे. उन्होंने परिवार को भरोसा दिलाया कि मुख्यमंत्री तक उनका संदेश जरूर पहुंचाया जायेगा और हरसंभव मदद की जायेगी.रिसड़ा के लोग कर रहे हैं प्रार्थना-दुआ
रिसड़ा के लोग चिंतित हैं. स्थानीय नागरिकों ने पूर्णम की सलामती के लिए मंदिरों में पूजा, मस्जिदों में दुआ और चर्चों में प्रार्थना शुरू कर दी है. जवान के लिए पूरा मोहल्ला एकजुट है. यह एक सिर्फ एक सैनिक की कहानी नहीं, यह उस हर परिवार की कहानी है, जो देश की सेवा के लिए अपने बेटे, भाई, पति को सरहद पर भेजता है. आशा और भय दोनों के बीच झूलता हुआ.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
