कोलकाता. ‘घास व जोड़ाफूल’ चुनाव चिह्न के फ्रीज होने के बाद रीतब्रत बनर्जी खेमे को नया नाम और नया चुनाव चिह्न मिल गया है. चुनाव आयोग ने रीतब्रत खेमे को ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ नाम और लिफाफा चुनाव चिह्न आवंटित किया है, लेकिन लिफाफा चुनाव चिह्न को लेकर अब इंडियन सेक्युलर फ्रंट (आइएसएफ) और रीतब्रत खेमे के बीच विवाद खड़ा हो गया है. आइएसएफ का कहना है कि लिफाफा उसका चुनाव चिह्न है और वह वर्ष 2021 से इसी चिह्न पर चुनाव लड़ रही है. पार्टी ने इस मामले में चुनाव आयोग को पत्र भेजकर कानूनी चुनौती देने की बात कही है.
नौशाद सिद्दीकी ने चुनाव आयोग को लिखा पत्र
आइएसएफ के एकमात्र विधायक नौशाद सिद्दीकी ने शुक्रवार को पत्रकार सम्मेलन में कहा कि उनकी पार्टी ने 10 मार्च 2026 को लिफाफा चुनाव चिह्न का नवीनीकरण कराया है. उनके अनुसार, 2021 से ही आइएसएफ इसी चुनाव चिह्न पर चुनाव लड़ रही है. उन्होंने सवाल उठाया कि जब यह चिह्न पहले से आइएसएफ के पास है, तो रीतब्रत खेमे को यही चिह्न कैसे आवंटित किया गया. सिद्दीकी के अनुसार, आइएसएफ ने इस मामले में कानूनी चुनौती देते हुए चुनाव आयोग को पत्र भेजा है. उन्होंने आरोप लगाया कि आइएसएफ को कमजोर करने के लिए साजिश की जा रही है. हालांकि, यह आरोप उनका राजनीतिक दावा है, जिसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है. उन्होंने भाजपा पर भी विपक्ष को कमजोर करने के लिए विभिन्न माध्यमों का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया.
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इस सिंबल से जीत चुके हैं दो बार चुनाव
इंडियन सेक्युलर फ्रंट का गठन 21 फरवरी 2021 को फुरफुरा शरीफ के पीरजादा अब्बास सिद्दीकी की देखरेख में हुआ था. बाद में पार्टी की कमान उनके भाई नौशाद सिद्दीकी के हाथों में आ गयी. 2021 के विधानसभा चुनाव में आइएसएफ से केवल नौशाद सिद्दीकी भांगड़ सीट से चुनाव जीत सके थे. 2026 के विधानसभा चुनाव में भी नौशाद ही विधानसभा में आइएसएफ के एकमात्र विधायक बने. इधर, नंदीग्राम विधानसभा उपचुनाव में रीतब्रत खेमे के प्रत्याशी मोहम्मद एतेशामुल हक ने नये चुनाव चिह्न पर खुशी जतायी है. शुक्रवार को उन्होंने कहा कि उन्हें नया चुनाव चिह्न मिलने से खुशी है और वह लिफाफा चुनाव चिह्न वाले प्रत्याशी के तौर पर नंदीग्राम में प्रचार करेंगे.
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