Supreme Court on West Bengal Election 2026: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद मचे राजनीतिक घमासान के बीच सुप्रीम कोर्ट से बड़ी खबर है. कोर्ट ने सोमवार को पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनके सहयोगियों को चुनाव में हुई कथित गड़बड़ियों के खिलाफ नयी याचिकाएं दायर करने की याचिका को मंजूर कर लिया है.
बंगाल की राजनीति में फिर शुरू हुई हलचल
ममता बनर्जी का आरोप है कि पश्चिम बंगाल की कम से कम 31 सीटों पर जीत का अंतर उन वोटों की संख्या से भी कम है, जिन्हें मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान हटा (Delete) दिया गया था. अदालत के इस रुख ने बंगाल की राजनीति में फिर से हलचल पैदा कर दी है.
31 सीटों पर वोटों की कटौती का पेच
चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ के सामने तृणमूल कांग्रेस के सांसद और वरिष्ठ अधिवक्ता कल्याण बनर्जी ने गंभीर आरोप लगाये.
- जीत का अंतर बनाम डिलीट वोट : ममता बनर्जी के वकील कल्याण बनर्जी ने दलील दी कि 31 विधानसभा क्षेत्रों में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की जीत का मार्जिन उन मतदाताओं की संख्या से कम है, जिनके नाम चुनाव से ठीक पहले लिस्ट से हटाये गये थे.
- नयी याचिका को मंजूरी : सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर ऐसे दावे हैं, तो प्रभावित पक्ष नयी और विस्तार से याचिकाएं दाखिल करने के लिए स्वतंत्र हैं. अदालत इन दावों की कानूनी जांच करेगी.
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Supreme Court on West Bengal Election 2026: चुनाव आयोग ने याचिका का किया कड़ा विरोध
भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) ने ममता बनर्जी के वकील की ओर से दी गयी इन दलीलों का पुरजोर विरोध किया. आयोग ने कहा कि चुनाव संपन्न होने के बाद किसी भी तरह की आपत्ति के लिए चुनाव याचिका (Election Petition) दायर करना ही कानूनी प्रक्रिया है. आयोग ने कहा कि वोट जोड़ने या हटाने की प्रक्रिया (SIR) नियमों के तहत हुई है. इस मामले में आयोग किसी भी कानूनी अपील का जवाब देने के लिए तैयार है.
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80 बनाम 207: क्या है बंगाल का समीकरण?
हाल ही में संपन्न हुए 294 सदस्यीय विधानसभा चुनाव में 90 प्रतिशत से अधिक बंपर वोटिंग हुई थी. नतीजों में भाजपा ने 207 सीटें जीतकर पूर्ण बहुमत हासिल किया है, जबकि ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस मात्र 80 सीटों पर सिमट गयी है. अब अगर 31 सीटों पर दोबारा कानूनी पेच फंसता है, तो यह भाजपा सरकार के लिए सिरदर्द बन सकता है.
