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Bengal News: कोलकाता. पश्चिम बंगाल में नवगठित शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली भाजपा (भारतीय जनता पार्टी) सरकार की पुलिस और प्रशासनिक व्यवस्था में आने वाले महीनों में एक और व्यापक पुनर्गठन होने की संभावना है, जिसके स्पष्ट संकेत पहले ही दिन दिखे, हालांकि अधिकारियों ने संकेत दिया कि यह प्रक्रिया संभवत: चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ेगी. अधिकारियों ने कहा कि अधिक स्थिर प्रशासनिक ढांचे की ओर यह बदलाव ऐसे समय में होगा जब निर्वाचन आयोग ने चुनाव से पहले राज्य की नौकरशाही और पुलिस तंत्र में अभूतपूर्व पैमाने पर फेरबदल किया था. राज्य प्रशासन के सूत्रों ने नयी नियुक्तियों को नयी भाजपा सरकार के तहत प्रशासनिक ढांचे को नये सिरे से आकार देने की स्पष्ट कोशिश बताया. उन्होंने कहा कि यह आगे आने वाले कई और आदेशों की शुरुआत भर हो सकती है.
प्रशासन में बड़े बदलाव की तैयारी
इस संभावित बदलाव का पहला स्पष्ट संकेत नौ मई को शुभेंदु अधिकारी के पदभार संभालने के कुछ घंटों के भीतर ही मिल गया, जब सरकार ने तेजी से दो अहम नियुक्तियां कीं. इसके बाद राज्य के मध्यम स्तर के प्रशासनिक ढांचे में कई अधिकारियों की फिर से नियुक्ति की गयी.विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया के दौरान निर्वाचन आयोग के विशेष मतदाता सूची पर्यवेक्षक रह चुके सेवानिवृत्त भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) अधिकारी सुब्रत गुप्ता को मुख्यमंत्री का सलाहकार नियुक्त किया गया, जबकि दक्षिण 24 परगना के अतिरिक्त जिलाधिकारी शांतनु बाला को मुख्यमंत्री का निजी सचिव बनाया गया. प्रशासनिक हलकों में इन नियुक्तियों को राज्य तंत्र के व्यापक पुनर्गठन की शुरुआती कवायद के रूप में देखा जा रहा है.
ममता के करीबी हो रहे सरकार से दूर
सुब्रत गुप्ता ने दो पूर्व मुख्य सचिवों- अलापन बंद्योपाध्याय और एच के द्विवेदी- की जगह ली है. दोनों ने राज्य में सत्ता परिवर्तन की पुष्टि करने वाले चुनाव परिणामों के एक दिन बाद पांच मई को पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के मुख्य सलाहकार पद से इस्तीफा दे दिया था. दूसरी ओर, बाला ने वरिष्ठ नौकरशाह गौतम सान्याल की जगह ली है, जो सुश्री बनर्जी के प्रधान सचिव थे. इसके तुरंत बाद राज्य सरकार ने प्रशासनिक ढांचे में एक और महत्वपूर्ण बदलाव की प्रक्रिया शुरू की, जिससे बंगाल की नौकरशाही के गलियारों में व्यापक पुनर्संतुलन के संकेत मिले. एक व्यापक आदेश में पश्चिम बंगाल सिविल सेवा (कार्यकारी) यानी डब्ल्यूबीसीएस के कम से कम 46 अधिकारियों को नयी तैनाती दी गई. ये अधिकारी पिछली सरकार में मंत्रियों के निजी सचिव और विशेष कार्याधिकारी के रूप में काम कर रहे थे.
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नये सिरे से बड़े फेरबदल का संकेत
बदलाव की यह लहर शासन के केंद्र तक भी पहुंची और राज्य सरकार ने मुख्यमंत्री कार्यालय से जुड़े 16 अधिकारियों का भी फेरबदल किया. मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने इससे पहले संवाददाताओं से कहा था कि ममता बनर्जी सरकार ने राज्य के प्रतिभाशाली आइएएस और भारतीय पुलिस सेवा (आइपीएस) अधिकारियों की कभी परवाह नहीं की, उन्हें अलग-थलग किया और कई बार उन्हें बंगाल छोड़ने के लिए मजबूर किया. उन्होंने कहा कि लेकिन नयी कैबिनेट के नीतिगत फैसलों को लागू करने के लिए इस सरकार को इन अधिकारियों की जरूरत होगी. उनके इस बयान को राज्य के पुलिस और प्रशासनिक ढांचे में नये सिरे से बड़े फेरबदल का संकेत माना जा रहा है.
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