सुकांत मजूमदार बोले- बंगाल में हिंदुओं के अल्पसंख्यक बनने का खतरा, 2026 अस्तित्व को बचाने की ‘आखिरी लड़ाई’

Sukanta Majumdar News: केंद्रीय मंत्री सुकांत मजूमदार ने दावा किया है कि डेमोग्राफिक चेंज के कारण पश्चिम बंगाल में हिंदू अल्पसंख्यक हो सकते हैं. उन्होंने 2026 के विधानसभा चुनाव को बंगाल बचाने की आखिरी लड़ाई बताया है.

Sukanta Majumdar News: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 से पहले सियासी पारा चरम पर है. केंद्रीय मंत्री और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता सुकांत मजूमदार ने राज्य में हो रहे जनसांख्यिकीय बदलाव (Demographic Change) पर सनसनीखेज दावा किया है. एक स्पेशल इंटरव्यू में केंद्रीय मंत्री ने चेतावनी दी कि यदि मौजूदा रुझान जारी रहा, तो बंगाल के कई जिलों में हिंदू अल्पसंख्यक बन जायेंगे. भविष्य में हिंदू उम्मीदवारों के लिए चुनाव जीतना लगभग असंभव हो जायेगा. उन्होंने 2026 के चुनाव को बंगाल के अस्तित्व को बचाने की ‘आखिरी लड़ाई’ करार दिया है.

बंगाल को पाकिस्तान-अफगानिस्तान बनने से रोकना है

सुकांत मजूमदार ने कहा कि यह चुनाव सिर्फ सत्ता परिवर्तन का नहीं, बल्कि पहचान बचाने का है. उन्होंने कहा- ममता बनर्जी खुद कहती हैं कि मुस्लिम आबादी 33 प्रतिशत है. यह वास्तव में 35 प्रतिशत तक हो सकती है. अगर यही हाल रहा, तो 2026 वह आखिरी चुनाव होगा, जिसमें बंगाली हिंदू निर्णायक भूमिका निभा पायेंगे. हमारा लक्ष्य बंगाल को पाकिस्तान या अफगानिस्तान बनने से रोकना है.

मुस्लिम मुख्यमंत्री की आहट और TMC की मजबूरी

केंद्रीय मंत्री ने भविष्य की राजनीतिक तस्वीर खींचते हुए दावा किया कि ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) को जल्द ही हिंदुओं की बजाय मुसलमानों को अधिक टिकट देने के लिए मजबूर होना पड़ेगा. बंगाल में उपमुख्यमंत्री और भविष्य के संकट भी बात की.

  • उपमुख्यमंत्री की मांग : पश्चिम बंगाल में मुस्लिम उपमुख्यमंत्री की मांग अभी से उठने लगी है.
  • भविष्य का संकट : यह मांगें अंततः मुस्लिम मुख्यमंत्री का रास्ता साफ करेंगी, जिससे राज्य की लोकतांत्रिक दिशा पूरी तरह बदल जायेगी.

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भवानीपुर में ममता बनाम शुभेंदु : भाजपा ने बदली रणनीति

2021 की हार से सबक लेते हुए भाजपा ने अपनी रणनीति में बड़े बदलाव किये हैं.

  • सीधी टक्कर : भाजपा ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ उनके गढ़ भवानीपुर से शुभेंदु अधिकारी को उतारने का फैसला किया है. भाजपा का लक्ष्य ‘दीदी’ को सीधे उनके निर्वाचन क्षेत्र में ही मात देना है.
  • बंगाल केंद्रित मुद्दे : भाजपा अब बाहरी के टैग को हटाकर ‘बंगाली और बंगाल-केंद्रित’ मुद्दों पर चुनाव लड़ रही है.
  • बूथ संगठन : पार्टी अब चेहरों की बजाय बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं और ‘टीम गेम’ पर भरोसा कर रही है.

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निवेश और शिक्षा पर भी सरकार को घेरा

केंद्रीय मंत्री ने राज्य की आर्थिक स्थिति पर भी चोट की. उन्होंने तुलना करते हुए बताया कि जहां गुजरात को देश के कुल एफडीआई (FDI) का 17 प्रतिशत मिलता है, वहीं बंगाल महज 0.66 प्रतिशत पर सिमटा है. उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले 15 वर्षों में राज्य में कोई बड़ा निवेश नहीं हुआ. शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गयी है.

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By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 30 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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