विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा हैं विप्लव सेन
कल्याणी. आंखों में अंधेरा जरूर है, लेकिन ज्ञान की रोशनी फैलाने का जुनून बरकरार है. सबके चहेते ‘रिवोल्यूशन सर’ विप्लव सेन आज भी छात्रों के भविष्य को संवारने में जुटे हैं. बचपन में गलत इलाज के कारण उनकी आंखों की रोशनी चली गयी थी, लेकिन उन्होंने इसे अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया. 2010 में स्कूल सेवा परीक्षा उत्तीर्ण कर उन्होंने शिक्षण कार्य शुरू किया. लगातार दो स्कूलों में सेवाएं देने के बाद वह अब नदिया जिले के शांतिपुर स्थित तंतुबाई हाइस्कूल में पढ़ा रहे हैं. विप्लव सेन अपनी शारीरिक बाधा को कभी याद नहीं करते. उन्होंने घर पर ब्रेल लिपि का अध्ययन किया और बाद में स्कूल में छात्रों को पढ़ाना शुरू किया. उनके पढ़ाने का तरीका इतना प्रभावी है कि वह सभी विद्यार्थियों के प्रिय शिक्षक बन गये हैं. छात्र कहते हैं कि विप्लव सर कठिन से कठिन विषय को भी बेहद सरल तरीके से समझा देते हैं, जिससे पढ़ाई आसान हो जाती है.
विद्यालय के प्रधानाध्यापक ने भी उनके संघर्ष और समर्पण की सराहना करते हुए कहा कि वह अन्य नेत्रहीनों के लिए आदर्श हैं. उन्होंने राजनीति विज्ञान की पढ़ाई की, लेकिन इतिहास और बांग्ला विषय भी पढ़ाते हैं. उनके शिक्षण में खास तरीका यह है कि वह कहानियों के माध्यम से पाठ्यक्रम को समझाते हैं. जब कोई विषय समझाना होता है, तो वह छात्रों में से किसी एक को चुनते हैं, अंक देते हैं और उसे बोर्ड पर लिखने के लिए कहते हैं. इससे कक्षा में रुचि बनी रहती है, और छात्र बड़ी उत्सुकता से उनके अगले निर्देश का इंतजार करते हैं.
विप्लव सेन न सिर्फ शिक्षक हैं, बल्कि शिक्षा की दुनिया में एक प्रेरणा भी हैं. उनका जीवन यह साबित करता है कि संकल्प और मेहनत से कोई भी बाधा छोटी पड़ सकती है.
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