West Bengal Re-polling 2026: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण का मतदान खत्म होने के बाद अब पुनर्मतदान (Re-polling) की चर्चा तेज है. निर्वाचन आयोग (ECI) दक्षिण 24 परगना जिले की 4 महत्वपूर्ण विधानसभा सीटों के 77 बूथों पर फिर से वोटिंग कराने की मांग पर गंभीरता से विचार कर रहा है.
ईवीएम और निगरानी कैमरों में गड़बड़ी की शिकायत
इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया को इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) से छेड़छाड़ और निगरानी कैमरों में गड़बड़ी जैसी कुल 77 गंभीर शिकायतें मिली हैं. सबसे चौंकाने वाला मामला मगरहाट पश्चिम से आया है, जहां मतदाताओं की जेब में ‘जासूसी कैमरे’ लगाकर उनकी वोटिंग पर नजर रखने का आरोप लगा है.
फालता और डायमंड हार्बर विधानसभा टॉप पर
आयोग को जो शिकायतें मिलीं हैं, उसके मुताबिक, दक्षिण 24 परगना में स्थिति बेहद तनावपूर्ण रही. किस विधानसभा सीट से कितनी शिकायतें आयीं हैं, उसका पूरा विवरण इस प्रकार है.
- फालता विधानसभा : यहां से सबसे ज्यादा 32 शिकायतें दर्ज की गयीं हैं.
- डायमंड हार्बर विधानसभा : अभिषेक बनर्जी के गढ़ से 29 शिकायतें मिली हैं.
- मगरहाट विधानसभा : यहां से 13 शिकायतें आयीं हैं, जिसमें जासूसी कैमरे वाला गंभीर आरोप शामिल है.
- बजबज विधानसभा : यहां से भी 3 शिकायतें प्राप्त हुई हैं.
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मौके पर जायेंगे स्पेशल ऑब्जर्वर : मुख्य चुनाव आयुक्त
शिकायतों की गंभीरता को देखते हुए मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार ने कोई भी जोखिम न लेने का फैसला किया है. उन्होंने विशेष पर्यवेक्षक सुब्रत गुप्ता को निर्देश दिया गया है कि वे खुद उन बूथों का निरीक्षण करें, जहां से गड़बड़ी की खबरें आयी हैं.
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West Bengal Re-polling 2026: 1 मई को फिर से हो सकती है वोटिंग
सुब्रत गुप्ता स्थानीय पर्यवेक्षकों से बातचीत कर रहे हैं. उनकी रिपोर्ट के आधार पर ही आयोग पुनर्मतदान पर अंतिम मुहर लगायेगा. अधिकारियों ने कहा है कि यदि रिपोर्ट में गड़बड़ी की पुष्टि होती है, तो प्रभावित बूथों पर शुक्रवार (1 मई) को ही दोबारा मतदान कराया जा सकता है.
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गड़बड़ी के नये तरीके : जासूसी कैमरे और ईवीएम से छेड़छाड़
वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि इस बार बिल्कुल नयी तरह की शिकायतें मिली हैं. मतदान की गोपनीयता भंग करने के लिए जासूसी कैमरों का इस्तेमाल और निगरानी कैमरों (CCTV) को जान-बूझकर बाधित करने के प्रयास किये गये हैं. इसके अलावा, ईवीएम मशीनों पर संदिग्ध पदार्थ लगाने के भी आरोप लगे हैं. आयोग के निर्देश स्पष्ट हैं कि किसी भी फैसले से पहले जमीनी स्तर पर पूरी पारदर्शिता बरती जाये.
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