सोनाली खातून घर लौटीं, रामपुरहाट अस्पताल में भर्ती

बीरभूम के रामपुरहाट में छह वर्षीय आफरीन की हंसी बंद नहीं हो रही थी, जब उसकी मां सोनाली खातून को शनिवार दोपहर सरकारी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के भीतर ले जाया जा रहा था, इस दौरान छायाकारों के फोटो खींचने का सिलसिला लगातार जारी था.

रामपुरहाट/कोलकाता. बीरभूम के रामपुरहाट में छह वर्षीय आफरीन की हंसी बंद नहीं हो रही थी, जब उसकी मां सोनाली खातून को शनिवार दोपहर सरकारी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के भीतर ले जाया जा रहा था, इस दौरान छायाकारों के फोटो खींचने का सिलसिला लगातार जारी था. इस वर्ष जून में दिल्ली पुलिस द्वारा बांग्लादेशी नागरिक होने के संदेह में गिरफ्तार की गयी और बाद में पड़ोसी देश भेज दी गयी, बीरभूम के मुरारई की प्रवासी निवासी सोनाली गर्भवती हैं. सोनाली खातून और उनके बेटे साबिर को कथित ‘घुसपैठियों’ के रूप में बांग्लादेश की जेल में 103 दिन बिताने के बाद शुक्रवार शाम को उत्तर बंगाल में मालदा सीमा के रास्ते भारत लाया गया था.

सुप्रीम कोर्ट द्वारा केंद्र को निर्देश दिये जाने के बाद सोनाली और उनके बेटे की घर वापसी हुई थी.उन्हें शनिवार को बीरभूम के रामपुरहाट अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां वह इस महीने के अंत में या अगले महीने की शुरुआत में प्रसव होने तक चिकित्सकों की निगरानी में रहेंगी.

आफरीन अस्पताल के स्त्री रोग विभाग में अपने दो साल बड़े भाई साबिर को कसकर पकड़े हुए थी, जिससे उसकी मुलाकात पांच महीने बाद हुई थी. उसे ठीक से पता नहीं था कि उसे अपने भाई और माता-पिता से अलग क्यों रखा गया था. आफरीन निर्वासित होने से बच गयी थी क्योंकि वह मुरारई में अपने दादा-दादी के साथ रह रही थी, जब उसके माता-पिता को दिल्ली में गिरफ्तार कर लिया गया था.

अस्पताल के कर्मचारी इमारत की दूसरी मंजिल पर प्रसव वार्ड में जब महिला को ले जा रहे थे तो आफरीन ने सोनाली की ओर इशारा करते हुए कहा: यह मेरी मां हैं.

सुनाली ने कहा: मैं अपनी बेटी और माता-पिता से मिलकर बहुत खुश हूं. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के सहयोग के बिना यह संभव नहीं होता. उन्होंने कहा कि उन्हें अपने अजन्मे बच्चे को लेकर थोड़ी चिंता के अलावा कोई बड़ी शारीरिक परेशानी महसूस नहीं हुई. इससे पहले दिन में, सोनाली को राज्य स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों द्वारा मालदा से रामपुरहाट अस्पताल ले जाया गया, जहां वह रात भर रुकी थी. रास्ते में वह अपने पैतृक गांव पैकर में कुछ देर के लिए रुकी, जहां उसके माता-पिता और बेटी भी उसके साथ थे.

क्या कहा सोनाली ने

सोनाली ने अस्पताल में कहा: बांग्लादेशी जेल की एकांत कोठरी में रहना यातनापूर्ण था. उन्होंने चपई नवाबगंज सुधार गृह में ‘घुसपैठिया’ के आरोप में सौ से अधिक दिन बिताने के अनुभव को याद किया. उन्होंने कहा: उन्होंने साबिर को मेरे साथ रहने की अनुमति दे दी. लेकिन मेरे पति दानिश को कहीं और ले जाया गया. मुझे उनकी चिंता है. मुझे स्वीटी बीबी और उनके बच्चों की भी चिंता है क्योंकि उनका भविष्य भी अनिश्चित है.

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