तृणमूल कांग्रेस के सिंबल फ्रीज मामले में सुप्रीम कोर्ट पहुंची ममता बनर्जी, जानिए अदालत ने सुनवाई पर क्या कहा

तृणमूल कांग्रेस के चुनाव चिन्ह पर प्रतिबंध के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने ममता बनर्जी की याचिका स्वीकार कर ली है. चुनाव आयोग के फैसले के खिलाफ दायर इस याचिका में तत्काल सुनवाई की मांग की गई थी. कोर्ट जल्द ही सुनवाई की तारीख तय करेगा.

कोलकाता. सुप्रीम कोर्ट ने तृणमूल कांग्रेस के चिन्ह पर प्रतिबंध लगाने के मामले में तत्काल सुनवाई की याचिका स्वीकार कर ली है. चुनाव आयोग ने गुरुवार रात तृणमूल कांग्रेस के नाम और चिन्ह पर प्रतिबंध लगा दिया था. इसके अगले दिन, यानी शुक्रवार को, ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर की. याचिका में आयोग के आदेश पर रोक लगाने के लिए तत्काल सुनवाई का अनुरोध किया गया था.

कपिल सिब्बल ने चुनाव आयोग की टाइमिंग पर उठाए सवाल

सर्वोच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने याचिका स्वीकार कर ली है. हालांकि, मामले की सुनवाई कब होगी, इस बारे में अभी तक कोई जानकारी नहीं दी गई है. वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने ममता बनर्जी द्वारा दायर याचिका के आधार पर मुख्य न्यायाधीश की पीठ के समक्ष इस मामले का उल्लेख किया. उन्होंने आयोग की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि आयोग ने इस मामले का निपटारा पहले क्यों नहीं किया? उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि चुनाव से ठीक पहले नामांकन दाखिल करने के अंतिम दिन नामों और चिन्हों को क्यों रद्द कर दिया गया.

चुनाव के बीच सिंबल फ्रीज करने का विरोध

कपिल सिब्बल ने कहा, "यह बहस जून में शुरू हुई थी. हमने जुलाई में अपना बयान दिया था. चुनाव आयोग ने अभी तक कुछ भी किए बिना चुनाव के बीच में ही हमारा नाम और चिन्ह फ्रीज कर दिया है. आयोग एक नया मील का पत्थर स्थापित कर रहा है." चुनाव आयोग ने चुनाव अधिसूचना के बीच में ही अधिसूचना जारी कर चिन्ह को फ्रीज कर दिया है. आखिर चल क्या रहा है? हम अनुरोध करते हैं कि इस मामले को तत्काल सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाए.

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सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

याचिका में आयोग के आदेश पर रोक लगाने के लिए तत्काल सुनवाई का अनुरोध किया गया था. मुख्य न्यायाधीश ने कहा, "सभी पक्षों को अपनी बात कहने का मौका मिलेगा. जब मामला सूचीबद्ध होगा, तो आप अपने तर्क प्रस्तुत करेंगे. हम मामले को सूचीबद्ध करने का प्रयास करेंगे." ऐसे में, मुख्य बात इस पर होगी कि इस मामले की सुनवाई कब होगी, यह मामला कब सूचीबद्ध होगा.

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लेखक के बारे में

By आशीष झा

डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव. लगातार कुछ अलग और बेहतर करने के साथ हर दिन कुछ न कुछ सीखने की कोशिश. वर्तमान में बंगाल में कार्यरत. बंगाल की सामाजिक-राजनीतिक नब्ज को टटोलने के लिए प्रयासरत. देश-विदेश की घटनाओं और किस्से-कहानियों में विशेष रुचि. डिजिटल मीडिया के नए ट्रेंड्स, टूल्स और नैरेटिव स्टाइल्स को सीखने की चाहत.

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