पश्चिम बंगाल में ग्रामीण विकास को गति देने और नयी ग्रामीण रोजगार योजना ‘विकसित भारत-जी राम जी’ (वीबी-जीरामजी) के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर पश्चिम मेदिनीपुर के मेदिनीपुर स्थित प्रद्योत स्मृति सदन में जिला स्तरीय सम्मेलन आयोजित किया गया. पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की ओर से आयोजित इस बैठक में योजना की रूपरेखा, कार्यान्वयन प्रक्रिया तथा जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों की भूमिका पर विस्तार से चर्चा की गयी.
सम्मेलन में राज्य के पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री दिलीप घोष, पश्चिम मेदिनीपुर के जिलाधिकारी बिजिन कृष्णा, अपर जिलाधिकारी गोबिंद हलदार, विधायक डॉ शंकर कुमार गुच्छैत, तपन दत्ता, शीतल कपाट, रामाप्रसाद गिरि, प्रदीप लोढ़ा, शुभाशीष ओम, शिउली साहा, दीनेन राय, जिला परिषद के सभाधिपति निर्मल घोष सहित प्रशासन के कई वरिष्ठ अधिकारी और जनप्रतिनिधि मौजूद रहे.
बैठक के दौरान मंत्री दिलीप घोष ने पंचायत स्तर पर विकास कार्यों में भ्रष्टाचार, अनियमितताओं और लापरवाही के आरोपों को लेकर कड़ा रुख अपनाया. उन्होंने कहा कि विभिन्न क्षेत्रों से इंजीनियरों और पंचायत सचिवों के खिलाफ शिकायतें मिली हैं. इन शिकायतों के आधार पर कई पुराने टेंडरों और परियोजनाओं के कार्यों को फिलहाल रोककर उनकी समीक्षा की जा रही है.
मंत्री ने कहा- कई मामलों में बिना टेंडर के नियमों के विरुद्ध काम कराया गया है. कहीं सरकारी धन के दुरुपयोग की शिकायत है, तो कहीं फिटनेस सर्टिफिकेट जारी होने के बावजूद जमीन पर सड़क का निर्माण नहीं हुआ. हर शिकायत की गंभीरता से जांच की जा रही है.
उन्होंने बताया कि पंचायत स्तर पर ऑडिट प्रक्रिया जारी है और कई इंजीनियरों का तबादला भी किया जा चुका है. उन्होंने स्पष्ट किया कि भ्रष्टाचार में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जायेगा. दिलीप घोष ने दावा किया कि भाजपा सरकार बनने के बाद ग्रामीण विकास से जुड़ी कई नयी योजनाएं शुरू की गयी हैं और पहले की तुलना में बजट आवंटन भी बढ़ाया गया है.
मंत्री ने कहा कि चुनाव से पहले और बाद में हुए विकास कार्यों की भी समीक्षा की जा रही है. उन्होंने कहा कि प्रत्येक जिले में नियमित समीक्षा बैठकों के माध्यम से विकास कार्यों की प्रगति पर नजर रखी जा रही है, ताकि सरकारी योजनाओं का लाभ पूरी पारदर्शिता के साथ वास्तविक लाभार्थियों तक पहुंच सके.
