मुख्य बातें
RG Kar Case: कोलकाता. महानगर में करीब दो वर्ष पहले आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में एक जूनियर महिला चिकित्सक के साथ दुष्कर्म और हत्या के मामले ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था. इस मामले के मुख्य आरोपी संजय रॉय को अदालत पहले ही आजीवन कारावास की सजा सुना चुकी है. हालांकि, इस मामले की जांच के कुछ पहलुओं पर सवाल उठाते हुए पीड़िता के परिवार ने एक बार फिर अदालत का दरवाजा खटखटाया है. इसी याचिका पर सुनवाई करते हुए मंगलवार को कलकत्ता हाइकोर्ट की नयी विशेष डिवीजन बेंच ने केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआइ) को बेहद सख्त निर्देश दिये हैं. मंगलवार को जस्टिस शंपा सरकार और जस्टिस तीर्थंकर घोष की नवगठित विशेष खंडपीठ (डिवीजन बेंच) में इस मामले की सुनवाई शुरू हुई. कोर्ट ने शुरुआत में ही अपना रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि इस पूरे मामले में पीड़िता के परिवार द्वारा दायर की गयी याचिका पर ही सबसे पहले सुनवाई की जायेगी. इसके तुरंत बाद अदालत ने जांच की प्रगति को लेकर सीबीआइ के वकील से कई तीखे सवाल पूछे.
अदालत ने सीबीआइ के अधिवक्ता से पूछे तीखे सवाल
सुनवाई के दौरान अदालत ने मुख्य घटनास्थल और सबूतों के संरक्षण को लेकर सीबीआइ को कटघरे में खड़ा किया. अदालत ने पूछा कि जब सीबीआइ ने पहली बार इस मामले की जांच अपने हाथ में ली थी, तब अस्पताल की कौन-कौन सी जगहों को सील किया गया था? इस पर सीबीआइ के अधिवक्ता ने जवाब दिया कि अस्पताल के उस विशिष्ट सेमीनार हॉल को सील किया गया है. इस पर अदालत ने पूछा कि क्या इसके अलावा किसी और जगह को सील करने की जरूरत महसूस नहीं हुई? इस पर सीबीआइ ने बताया कि इसके अलावा किसी और जगह को सील नहीं किया गया था.
क्राइम सीन को सुरक्षित रूप से सील करने का आदेश
सीबीआइ के जवाबों के बाद हाइकोर्ट की खंडपीठ ने चिंता जताते हुए पूछा कि क्या इस बीच कभी भी उस सेमिनार रूम के सील को किसी भी कारण से खोला गया था? सबूतों के साथ छेड़छाड़ की आशंका और मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए अदालत ने बेहद कड़ा रुख अपनाया. हाइकोर्ट ने सीबीआइ को निर्देश देते हुए कहा कि आरजी कर अस्पताल के उस सेमिनार रूम को बेहद त्वरित गति और पूरी सुरक्षा के साथ दोबारा सील किया जाये. इसके अलावा भी अगर जांच के लिहाज से किसी अन्य जगह को सील करने की जरूरत है, तो सीबीआई उसे भी तुरंत सील कर दे. अदालत ने साफ किया कि किसी भी परिस्थिति में मुख्य घटनास्थल या सबूतों को कोई नुकसान नहीं पहुंचना चाहिए. मामले की गंभीरता और पीड़ित परिवार द्वारा उठाये गये सवालों के महत्व को देखते हुए विशेष पीठ ने इस मामले की अगली सुनवाई आगामी गुरुवार को तय की है.
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21 मई को होगी मामले की अगली सुनवाई
कलकत्ता उच्च न्यायालय ने मंगलवार को कहा कि वह सीबीआइ और आरजी कर बलात्कार-हत्या पीड़िता के माता-पिता की याचिका पर 21 मई को सुनवाई करेगा, जिसमें मामले की आगे की जांच करवाने का अनुरोध किया गया है. गौरतलब है कि आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में बलात्कार व हत्या की शिकार हुई डॉक्टर के माता-पिता ने अपराध की आगे की जांच का अनुरोध करते हुए उच्च न्यायालय में याचिका दायर की है. उनका दावा है कि इस जघन्य घटना में एक से अधिक व्यक्ति शामिल थे. मंगलवार को न्यायमूर्ति शंपा सरकार की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने निर्देश दिया कि वह केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआइ), जिसे उच्च न्यायालय द्वारा बलात्कार-हत्या की जांच का जिम्मा सौंपा गया है तथा पीड़ित डॉक्टर के माता-पिता की याचिका 21 मई को सुनेगी.
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