बांग्लादेशी नागरिक के मतदाता पहचान पत्र को लेकर बंगाल में सियासी घमासान

सत्तारूढ़ दल के नेताओं के साथ देखा गया है. वहीं, पिछले साल बांग्लादेश में हुई हिंसा के दौरान उसी युवक को वहां भी देखा गया था.

कोलकाता. दक्षिण 24 परगना के काकद्वीप में एक बांग्लादेशी युवक द्वारा कथित तौर पर अवैध रूप से मतदाता पहचान पत्र बनवाने के आरोप पर सोशल मीडिया पर एक वीडियो (जिसकी सत्यता की पुष्टि नहीं की गयी है) वायरल होने के बाद भाजपा और तृणमूल कांग्रेस के बीच राजनीतिक विवाद गहरा गया है. सोशल मीडिया पोस्ट में आरोप लगाया गया है कि न्यूटन नामक एक युवक ने बांग्लादेशी होने के बावजूद यहां मतदाता पहचान पत्र बनवा लिया है और उसे कई कार्यक्रमों में सत्तारूढ़ दल के नेताओं के साथ देखा गया है. वहीं, पिछले साल बांग्लादेश में हुई हिंसा के दौरान उसी युवक को वहां भी देखा गया था. इस मुद्दे को लेकर भाजपा के स्थानीय नेताओं ने आरोप लगाया है कि तृणमूल नेताओं की मदद से बांग्लादेशियों को बंगाल में शरण मिल रही है. इस मामले पर तृणमूल के प्रदेश महासचिव कुणाल घोष ने संवाददाताओं से कहा कि किसने बंगाल आकर मतदाता पत्र बनवाया और कैसे बनवाया, यह तो बाद की बात है. पहला सवाल यह है कि बांग्लादेश से भारत में घुसपैठ कैसे हुई? क्या इसे रोकने की जिम्मेदारी केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीन केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीएपीएफ) की नहीं थी? इसमें किसकी विफलता है? उन्होंने भाजपा नेताओं के आरोपों को निराधार भी बताया. सोशल मीडिया पर वायरल पोस्ट को लेकर कथित ”न्यूटन” नामक शख्स ने भी सोशल मीडिया पर अपने बयान का एक वीडियो (जिसकी सत्यता की पुष्टि भी नहीं की गयी है) पोस्ट करते हुए दावा किया है कि वह काकद्वीप का निवासी है. बांग्लादेश में उसकी कुछ पैतृक संपत्ति है और उसकी देखरेख के दौरान वह पिछले साल बांग्लादेश गया था, जहां वह हिंसा में फंस गया था.

उसने आरोप लगाया कि उसके खिलाफ गलत प्रचार किया जा रहा है.

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By SANDIP TIWARI

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